Friday, April 3, 2009

श्री राम कथा-काव्य

आया बच्चो चैत्र मास
नवमी का दिन इसमे खास
प्रभु श्री राम का हुआ जन्म
माने इसको हिन्दु धर्म
अवध नगर के राजा दशरथ
चार हुए उनके प्यारे सुत
राम लखन और भरत शत्रुघ्न
चारों ही अनमोल रत्न
चारों पिता के आज्ञाकारी
खुश थी उनसे परजा सारी
गुरु आश्रम मे शिक्षा पूरी
आशा न थी कोई अधूरी
कई राक्षसों का किया संहार
मिटाया भू पर अत्याचार
तभी तो राम आदर्श कहाए
स्वयं प्रभु धरती पर आए
तारी पाहन बनी अहिल्या
धन्य थी माता कौशल्या
शिव धनु तोड के ब्याह रचाया
जनक दुलारी को अपनाया
सजना था जब अवध का ताज
माता कैकेयी हुई नाराज
मांग लिए उसने दो वचन
भूप भरत और राम को वन
हँस कर माँ का रक्खा मान
पिता के पूरे इए वरदान
सिया लखन को संग लिवाय
वन मे चौदह वर्ष बिताए
हर ली जब रावण ने सीता
तो जाकर लंका को जीता
फिर से अवध जब वापस आए
तो फिर राजा राम कहाए
कुछ समय तो सुख से बिताया
इक धोबी ने कह सुनाया
रक्षा करो राजा के मान की
तज दो अपनी पत्नी जानकी
रावण कैद मे रहकर आई
नहीं बन सकती वो राजमाई
दुविधा हुई राजा को खास
दे दिया पत्नी को वनवास
दो पुत्रों के बने पिता
लव-कुश की माता थी सीता
वाल्मीकि आश्रम में रहकर
जीवन में कष्टों को सहकर
बडेहुए थे दोनों सुत
शक्ति उनमें थी अदभुत
एक बार राम से भी टकराए
पर कोई भी हार न पाए
तब श्री राम ने राज यह जाना
अपने पुत्रों को पहचाना
पत्नी त्याग पर पश्चाताप
राम तो करने लगे विलाप
पर सीता धरती माँ जाई
माँ की गोदि में ई समाई
लव-कुश को दे अवध का राज
त्याग दिया प्रभु ने सब काज
जाकर स्वयं वो जल में समाए
महामानव वो जग मे कहाए
मर्यादा पुरुषोत्तम राम
सदा रहेगा जग में नाम

राम नवमी की आप सबको ढेरों शुभ-कामनाएं एवम हार्दिक बधाई


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पाठक का कहना है :

आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' का कहना है कि -

राम कथा की बालोचित सरस प्रस्तुति...साधुवाद...

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