Monday, April 6, 2009

काम की बातें शृंखला- कडी १



अंतर्मन की शुद्धि से मिट जाते सब पाप
अपनी भूलों पर करें, दिल से पश्चाताप
दिल से पश्चाताप,करें संताप मिटायें.
त्रुटि का करें सुधार , क्षमा का संबल पाएं
कह सीमा कर स्नेह सभी से जो हों सज्जन
द्वेष न किंचित करें , शुद्ध रखें अंतर्मन

महावीर ज्यंती की आप सबको हार्दिक बधाई एवम शुभ-कामनाएं

इसमें सुधार कर विशेष सहयोग के देने लिए आचार्य संजीव वर्मा सलिल जी की आभारी हूँ


आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)

2 पाठकों का कहना है :

आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' का कहना है कि -

उद्देश्यपूर्ण अच्छी रचना के लिए सीमाजी को बधाई.

manu का कहना है कि -

सुंदर रचना,
छोटे बड़े सभी के लिए जरूरी,,,,,
इसके अलावा आचार्य का सहयोग भी देख कर मन में कुछ ज्यादा ही ख़ुशी हुयी,,,,,
आचार्य को तो धन्यवाद भी कहू तो कैसे,,,,,सब पर स्नेह एक सा ही रखते हैं,,

आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)