Sunday, April 19, 2009

आपके मंत्रालय

शाबाश ,सभी के जवाब सही हैं ,तो मंत्रालय भी बाँट ही दिए जाय

प्रधान मंत्री -डी.एस चौहान जी

उप प्रधानमन्त्री- DREAMER (अगर आप साबित कर दे कि आप भारत के नागरिक हैं ,आपका तारुफ्फ़ कुछ ग़लतफ़हमी बढ़ा रहा है ),अगर आप विदेशी निकले तो आपको विदेश का रास्ता दिखाया जा सकता है कुछ हिन्दी नाम रख लो भाई हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा

गृह मंत्रालय -तपन

सूचना एवं प्रसारण - राघव

शिक्षा मंत्रालय -आचार्य सलिल

मानव संसाधन मंत्रालय -शन्नो

वस्त्र एवं खाद्द्याँ मंत्रालय -मनु

पर्यटन मंत्रालय -नीति (शन्नो जी कि शिकायत के आधार पर कि आप फुर्र से उड़ जाती हैं )

बाल कल्याण मंत्रालय -सीमा सचदेव

तो सभी प्रतिभागी शपथ लेते हैं की जो मंत्रालय उन्हें दिए गए हैं ,उन्हें सहर्ष स्वीकार करेंगे ,एक जिम्मेदार नागरिक बनेंगे ,अपने आस -पास होने वाले किसी बुराई या अन्याय को नही सहन करेंगे ,मिलजुल कर रहेंगे और हाँ शन्नो जी की बात हमेशा मानेंगे ,
जय हिंद ,जय भारत


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10 पाठकों का कहना है :

neelam का कहना है कि -

rachna beta ,
itne imaandaar log raajniti me nahi hote ,isliye tumhaare naajuk kandhon par koi bhaar nahi daala hai humne ,theek kiya n humne

shanno का कहना है कि -

नीलम जी,
जानकर बहुत हर्ष हुआ कि तमाम लोगों को आपने किसी न किसी मंत्रालय में फिट कर दिया है. उन सबको बधाई हो! मेरी तरफ से आपको मुझे वहीँ का वहीँ चिपका कर रखने का बहुत शुक्रिया. नीति जी को भी कहीं सैर-सपाटा करते हुए खबर मिल ही गई होगी अपने बारे में. उनके दिल पर क्या बीत रही होगी वही जानें. जिन लोगों के घोड़े दौड़ रहे थे वह भी race में जीत गये ऐसा सब होने पर कक्षा का standard ऊंचा ही हुआ होगा मेरे ख़याल से. और कमाल की बात है कि मस्त-मौला मनु जी को भी उनके चाहने या न चाहने पर भी वस्त्र-मंत्रालय में कुर्सी मिल गयी. चलो अब टोपियों में नये फैशन के आने की संभावना की जा सकती है. आपके सिर पर से भी कुछ बोझ कम हुआ सबको अपनी-अपनी duties सौंप कर. अब दो-चार दिन के लिये आप चैन की बंसी बजाइये. Till then खुदाहाफिज़.

manu का कहना है कि -

नीलम जी,
हमने कहाँ आपसे मंत्रालय की मांग की थी,,,,?
हमें भी रचना जी की तरह पाक साफ़ काहे नहीं रखा,,,,?
एक और चीटिंग....
मतलब,,
हाजिरी लगाना ही गुनाह हो गया..
आखिर ऐसा क्या ये चुनाव हो गया,,,,,

आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' का कहना है कि -

कहूँ इसे ईनाम या, मानूं इसको दंड.
शिक्षा मंत्री है वही, जो सबसे उद्दंड.
जो सबसे उद्दंड, तंग सबको करता है.
शिक्षा स्वयं न गहे, व्यर्थ कविता करता है.
नेह नर्मदा तीर रह, कर भी जो बेनाम.
-दिव्यनर्मदा.ब्लागस्पाट.कॉम
माने इसको दंड या कहे इसे ईनाम?

सीमा सचदेव का कहना है कि -

हमने तो अब तक यहां , हाजिरी न लगाई
चुनाव घोषणा पत्र की ,खबर भी नहीं पाई
खबर भी नही‍ पाई , आए देरी से अकसर
सर को झुकाए खडे , आज मार्ग में अफ़सर
हुई बडी हैरान , लगी सांसें भी थमने
हुआ क्या है आज , नही यह जाना हमने ।
पहुंचे बाल-उद्यान , गार्ड इक भागा आया
जल्दी से आ पास , नम्र हो शीश झुकाया
दरवाजा गाडी का , खोल के राह दिखाई
देख के इतनी इज्जत , मन ही मन सकुचाई
हो गए सारे पागल , या फ़िर मै हूं सोई
बच्चों के से प्यारे से , सपनों में खोई
च्यूंटी खुद को काटी , फ़िर खुद को समझाया
सर ऊंचा कर गर्व से ,आगे कदम बढाया
संसद भवन में पहुंच , के ही जाना यह राज
बाल-कल्याण मंत्री का , हमें मिला है ताज
शीशे में जा देखा , स्वयं को न पहिचाना
बिन मांगे ही ताज , क्या सतयुग का जमाना
सोचा आज भी जिन्दा ,इमान का लेखा भाई
तभी तो बिन मांगे ही , हमने पदवी पाई
राजनीति को भ्रष्ट कहें , अग्यानी जन
इमानदारी से फ़ल रहा , प्यारा सा बचपन
खुद का पद संभाल , मेरे मन में यह आई
बाकी सब मंत्रालयों पर भी , नजर दौडाई
देख के सबके नाम , मुझे तो हुआ अचम्भा
लम्बी चौडी लिस्ट से भरा,हुआ था खम्भा
जाने-पहचाने चेहरे , और उनके विभाग
मिला उसे जिस पर ,बेइमानी का दाग
खुद को बेइमानों की , पंक्ति में खडे पाया
क्या किया सबने घपला , अपना दिमाग लडाया
समझ नहीं कुछ आया , करें क्यों माथापच्ची
इन सब बातों में , अभी है बुद्दि कच्ची
धीरे-धीरे सीख जाएंगे , बनकर मंत्री
आगे-पीछे घूमेंगें जब , अपने संत्री

dreamer का कहना है कि -

बहुत नाइंसाफी है नीलम जी...... कि अब आप भी राजनीती में भाग लेने लग गए है...... और हम देश के नागरिक है कि नहीं इसका हमसे ही प्रमाण माँगा जा रहा है या क्या काफी नहीं है कि हम हमारे देश की भाषा बोल रहे है और हिंदी युग्म जों किया हुआ है......वैसे आपने ही एक और नाम भी दिया है हमे वो बहुत अच्छा है........ इससे जादा क्या प्रमाण दे सकते है हम आपको बाकी आपकी मर्जी....... इस बार सबसे पहले और बिलकुल सही उतार हमने दिए या तक की राघव जी के मन में जो चन्द्र शेखर जी को ले कर जो असमंजस था वो भी दूर किया उसके बाद भी आपने राजनीती में भाग लेकर डी एस चौहान जी को प्रधान मंत्री पद दे दिया.... हम बस यही जानना चाहते है की आखिर ऐसी क्या खता हो गयी हमसे या कहा गलत है हम..... या आपको लगा की हम देश के नागरिक नहीं है इसलिए यह निर्णय लिया आपने........

neelam का कहना है कि -

स्वपन दर्शी जी ,
हमे संशय है ,कि आप भारतीय नहीं हैं ,आपने कहा है कि आपने हिंदी में लिखा है ,तो आपकी जानकारी के लिए हिंदी बहुत ही आसन भाषा है ,कोई भी सीख सकता है ,मगर भाषा कि इज्जत वही कर सकता है जो मूल रूप से भारतीय हो अपनी भाषा कि गरिमा को पहचानता हो ,आपने चूक कर दी है ,एक बार पुनः अपने और प्रधानमन्त्री जी के उत्तर पढें ,आपको अपनी गलती खुद समझ में आ जायेगी

rachana का कहना है कि -

गुरु सदैव शिष्य का भला चाहता है आप ने बिल्कुल ठीक किया ..अभी विदेश मै हूँ तो यहाँ हिन्दी और भारत का परचम ऊँचा रखने की कोशिश कर रहीं हूँ आशिर्वाद दीजिये
ओम गुरुवाये नमः
सादर
रचना

shanno का कहना है कि -

बिन मांगे मोती मिलें और मांगे मिले ना भीख
बिन मांगे कुर्सी मिली न रहा किसी को दीख
नीलम जी ने कृपा कर कुर्सी पर दिया बिठाय
सीमा तो लग रहा ख़ुशी से फूली नहीं समाय
कुर्सी दी गई हैं बहुत सोच समझ और चुनके
मन में लड्डू फूट रहे हैं'सलिल'और तपन के
PM बनने का सपना पूरा हुआ कूद रहे चौहान
सबको पीछे छोड़कर उनको बना दिया बलवान
Dreamer तो कुर्सी पर बैठे ठाठ से रहे हैं ऊंघ
अब नाक चढाकर रहे हैं राघव मंत्रालय को सूंघ
नीति जी आओ अब आप भी कहना लो मान
मनु को भी काम बिन कुर्सी मिली है कैसी शान
अब संभालिये सब लोग अपने कन्धों पर का भार
दूर कीजिये आप लोग अब देश से सारा भ्रष्टाचार.

neeti_s@yahoo.com का कहना है कि -

are waah!!! mujhe ghoomna achchha lagta hai,aur aapne bahut achchha mantralay mujhe diya. dhanywaad!!!wo kya mai abhi-2 ghoom kar louti hun isliye yahan aane me late ho gai..,,aap sabko garmiyon ki chhutti par ghumne par vishesh chhoot dene ki soch rahi hun ...aap sabko meri aur se hawai yatra bilkul free.... to bas der kis baat ki vishesh chhut ka laabh uthaye......aapki parytan mantri....

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