Wednesday, July 4, 2007

बच्चे की भाषा


बच्चों के लिए भाषा क्या है ? बच्चों के लिए भाषा क्या कर सकती है ?ऐसे सवालों का जवाब् खोजते हुए कई बाल मनोवैज्ञानिको और शिक्षाविदों की कलम चली है और कई प्रयोग किए गये है ।एन सी ई आर टी के वर्तमान निदेशक श्री कृष्ण कुमार,जो हमारे गुरु भी रहे हैं, की पुस्तक बच्चे की भाषा और अध्यापक इस दृष्टिकोण से एक अत्यंत महत्वपूर्ण पुस्तक है और बहुत सराही भी गयी है।वे कहते है कि हम मे से कई लोग यह मानने के आदि हैं कि भाषा सम्प्रेषण का साधन है जबकि सोचने ,महसूस करने और चीज़ों से जुडने के साधन के रूप में भाषा की उपयोगिता को अक्सर भूल जाते हैं ।बच्चा भाषा द्वारा रचे गये वातावरण मे जीता और बडा होता है और भाषा का जितना लचीलेपन से वह प्रयोग करता है उतना ही जीवन की विभिन्न परिस्थितियों का सामना करने की उसकी क्षमता बढती है ।
*****
----सो , बच्चा शब्दों से खेलता है ,अपने अनुभवों को प्रस्तुत करता है ,पडताल और तर्क करता है।
पैदाहोने के साथ ही भाषा से उसका परिचय होता है ।शुरु शुरु मे बोली जाने वाली जितनी भी ध्वनियाँ और शब्द होते है ;उनका अर्थ भले ही वह न जाने पर धीरे धीरे उसके लिए वे महत्वपूर्ण हो जाते है ।और अनुभावों के साथ साथ उसका भाषा का दायरा भी बढता है और लचीलापन भी आता है ।वह भाषा के मामले में प्रयोगशील होता है । आप उसे कविता सिखाएँगे ---
Papa darling ,mamma darling ,
I love u
See your baby dancing
Just for you…
-वह अगली बार उसमे खुद से जोड देगा
papa darling, mamma darling,maasi darling , anupam darling ,nani darling
I love you…..
तो जितने भी सम्बन्ध उसे प्रिय हैं वह उन सब को लाएगा कविता के बीच ।यह जुडाव है ,अभिव्यक्ति है ,भावनात्मकता है । पापा का चश्मा गोल गोल की जगह जब मैने एक बच्चे को पापा का चश्मा रेक्टैंगल [पिता का चश्मा वाकई आयताकर लेंस वाला था ] कहते सुना तो समझ आया कि भाषा उसके लिए तर्क भी है । वह रेक्टैंगल शब्द से परिचित न होता तो यह तर्क नही कर सकता था ।
तुतलाने वाले बच्चे के लिए भी भाषा और ध्वनियाँ तक भी खेलने खुश होने का साधन है ।वे अपने मन से कुछ भी अटपटा गाते कहते हैं ।ऐसे ही बच्चे जो अभी भाषा और अर्थ नही जानते ,बस ध्वनि से हुलसते है ,के लिए एक कबीलाई लोकगीत प्रस्तुत है जिसका अर्थ उनके लिए महत्वपूर्ण नही । यह उनके खेलने और खिलखिलाने का गीत है जैसे – अक्क्ड बक्कड बम्बे बो ,.......सौ मे लगा ताला चोर निकल के भागा।*********

टुईयाँ गुईयाँ
ढेम्पूला की चुईयाँ
बेंगी पुंगी चिक्कुल भाकी
नक थुन धाकी भुईयाँ

अब दुन भेला ठुन् ठुन केला
बीन भनक्कम पुईयाँ

हगनू पटला झपड तो बटला
शुकमत टमटम ठुईयाँ

गझगन चिम्बू छुकछुन लिम्बू
झलबुल टोला दुईयाँ
टुईयाँ गुईयाँ
किंचुल गोला मुईयाँ ।



[हेमंत देवलेकर
द्वारा प्रस्तुत
नया ज्ञानोदय
अक्तूबर 2006]


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9 पाठकों का कहना है :

रवि रतलामी का कहना है कि -

बढ़िया स्तुत्य प्रयास है.

रवि रतलामी का कहना है कि -

और बच्चा बड़ा प्यारा है - कौन है यह?

इष्ट देव सांकृत्यायन का कहना है कि -

बाल साहित्य पर हिंदी के किताबवीर तो कोई काम कर नहीं रहे हैं. समझ नहीं है, लिहाजा हेठी समझते हैं. ब्लोगवीरों ने शुरू किया यह अच्छी बात है. प्रयास स्तुत्य है, जारी रखें.

Sanjeet Tripathi का कहना है कि -

यह कोना बहुत ही जरुरी था यहां!!
शुभकामनाएं

सुजाता का कहना है कि -

रवि जी आपने प्रयास को सराहा
धन्यवाद !
इस बच्चे का पता गिरिराज जी को पता है :)वैसे सभी बच्चे बहुत प्यारे होते है । है न!
इष्ट देव जी,सन्जीत जी शुक्रिया !

गिरिराज जोशी का कहना है कि -

सही लिखा है सुजाताजी।

रविजी,

यह तस्वीर कवि राजीव रंजन प्रसाद जी की बेटी कुहू की है, आप कुहू की आवाज में राजीवजी की कविता भी सुन सकते है - http://www.hindyugm.mypodcast.com/ पर...

शोभा का कहना है कि -

बहुत अच्छा प्रयास है । हिन्द युग्म को मेरी ओर से बधाई ।

Anonymous का कहना है कि -

can i get audio/vedio of "mamma darling...." song .i will be greatfull and my kid will be thank ful if you can send it to koshy.alex@tns-global.com .
thanks,
koshy

Anonymous का कहना है कि -

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