Monday, September 13, 2010

चिड़ियों का अलार्म

सुबह-सुबह ही मेरी बगिया
चिड़ियों से भर जाती है
उनके चीं-चीं के अलार्म से
नींद मेरी खुल जाती है।

वे कहतीं हैं उठो उठो
अब हुआ सबेरा जागो
उठ कर अपना काम करो
झटपट आलस को त्‍यागो।

मूल्यवान जो समय गंवा कर
बहुत देर तक सोते
प्‍यारे बच्चों जीवन में वह
अपना सब कुछ खोते।

शरद तैलंग

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बच्‍चो, साथ ही जाकिर अली रजनीश की कविता आओ बांध दू राखी भी पढें, ये कविता भी आपको पसंद आएगी।


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10 पाठकों का कहना है :

माधव का कहना है कि -
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Anonymous का कहना है कि -
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Disha का कहना है कि -
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रावेंद्रकुमार रवि का कहना है कि -
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shanno का कहना है कि -
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Anonymous का कहना है कि -
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ram का कहना है कि -
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riya का कहना है कि -
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Arshia का कहना है कि -

रोचक कविता।

TechGape.Com का कहना है कि -

Nice poem

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