Monday, September 6, 2010

पप्पू की जिद




पप्पू की जिद
सुबह सवेरे पप्पूजी
बागीचे में जब उठ कर आये,
देख के घोंसला चिड़िया का
ख़ुशी से थे चीखे चिल्लाये,
ताली मारते, उछ्लते-कूदते
दौड़ के फिर वो घर में आये,
बड़े जोश में मम्मी जी को
बागीचे में वो खींच के लाये
आओ मम्मी आओ देखो
नन्हे-नन्हे प्यारे बच्चे
पंख हैं उनके मखमल जैसे
वर्षा में हों भीगे जैसे
पर हम इनको प्यार करें तो
चिड़िया चूँ-चूँ शोर मचाये
तुम्ही बताओ कैसे इनको
खेलने को हम घर में लायें
मम्मी बोली प्यारे बच्चो
जैसे तुम हो छोटे बच्चे
अपनी माँ के प्यारे-दुलारे
वैसे ही चिड़िया को भी हैं
अपने बच्चे सबसे प्यारे
तुमको गर कोई चोट लगे तो
मम्मी जी का दिल घबराये
वैसे ही बच्चो को लेकर
चिड़िया भी है शोर मचाये
अभी तो ये उड़ना न जानें
न ही ये खाना भी जानें
तभी तो दूर दूर से ला कर
इनकी माँ इन्हें खाना खिलाये
अगर किसी की भूल से बच्चो
घोंसले से ये नीचे गिर जाएँ
तो बिल्ली चुपके से आकर
इनको अपना शिकार बनाये
प्यार से मम्मी जी ने था जब
पप्पू जी को ये समझाया
चिड़िया का यूँ शोर मचाना
तब था उसकी समझ में आया
किसी भी पक्षी को फिर ले कर
कभी नहीं वो जिद मेआया

--
डा0अनिल चड्डा,
निदेशक,
दूरसंचार विभाग,
संचार भवन, नई दिल्ली
09013131345,
09868909673


आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)

6 पाठकों का कहना है :

माधव का कहना है कि -

बढ़िया

रावेंद्रकुमार रवि का कहना है कि -

कविता में कहानी अच्छी है!

Royashwani का कहना है कि -
This comment has been removed by the author.
Royashwani का कहना है कि -

बाल सुलभ सोच से लिखी एक अच्छी कविता है यह. कवि का प्रयास सराहनीय है. बच्चों को ज़रूर इससे समझ मिलेगी कि बच्चे चाहे चिड़िया के हों या कोई और...वो बड़े नाज़ुक होते हैं. साथ ही उन्हें ये मालूम होगा कि उनकी माँ की तरह चिडिया भी अपने चूजों की कितनी फिक्र करती है. बहुत साधुवाद!
अश्विनी कुमार रॉय

डॉ. नागेश पांडेय "संजय" का कहना है कि -

सरल , सहज , सुन्दर , मनहर कविता के लिए आपको बधाई .

Anonymous का कहना है कि -

very good

आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)