Thursday, August 12, 2010

नौ एकम नौ, नौ दूनी अट्ठारह,


नौ एकम नौ, नौ दूनी अट्ठारह,

नौ एकम नौ,
नौ दूनी अट्ठारह,
मुँह धो के आलस,
कर दो नौ दो ग्यारह


नौ तीए सत्ताईस,
नौ चौके छत्तीस,
हँस-हँस के करते रहो,
खुशियों की तुम बारिश


नौ पंजे पैंतालीस,
नौ छके चौव्वन,
कर लो जो कुछ करना है,
फिर बीत जायेगा जीवन

नौ सत्ते त्रेसठ,
नौ अटठे बहतर,
संग बुरे बच्चों का हरदम,
होता ही है बदतर


नौ नामे इक्यासी,
नौ दसे नब्बे,
बबलूजी पहाड़े पढ़ कर,
हो गये हक्के-बक्के ।



--
डा0अनिल चड्डा,



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पाठक का कहना है :

माधव का कहना है कि -
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