Friday, June 12, 2009

विज्ञान

जन जीवन को सुखी बनाया
देखो यह विज्ञान की माया
नित नया अन्वेष कराया
जन जन तक इसको पहुंचाया .

सुख सुविधा के ढ़ेर लगाए
स्वर्ग धरा पर यह दिखलाए
बिजली, कूलर, पंखा आए
फ्रिज, ए. सी. ठंडा रखवाए .

गाड़ी, मोटर, प्लेन जरूरी
दूर लगे न कोई भी दूरी
आशा सबकी करते पूरी
पैसा रखना जेब जरूरी .

दूर गगन में धाक जमाई
उपग्रह की भरमार लगाई
चंदा की धरती खुदवाई
मंगल की भी सैर कराई .

सागर में भी पैठ लगाई
पनडुब्बी में दौड़ लगाई
सागर तल की कर खुदवाई
ईंधन की भरमार लगाई .

कंप्यूटर का खेल निराला
हर कोई जपता इसकी माला
मोबाइल जेब में सबने डाला
भैया, दीदी, मम्मी, खाला .

खुशियां सबके जीवन आएं
मिलकर आओ बांटें खाएं
द्वेष शत्रुता भूल जाएं
जग में हर जीवन महकाएं .

कवि कुलवंत सिंह
kavi kulwant singh


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6 पाठकों का कहना है :

Science Bloggers Association का कहना है कि -

विज्ञान की महिमा अपरम्‍पार।

-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

श्यामल सुमन का कहना है कि -

विज्ञान चमत्कार के साथ साथ उसपर इतनी सहज ग्राह्य कविता चमत्कार से कम है क्या? वाह कुलवंत भाई।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.

AlbelaKhatri.com का कहना है कि -

maza hi aa gaya
badhaai

Manju Gupta का कहना है कि -

कंप्यूटर का खेल निराला
हर कोई जपता इसकी माला
मोबाइल जेब में सबने डाला
भैया, दीदी, मम्मी, खाला .
Bale-bale, badhayi
Vaigyaniik ne vigyan ke shabdo ka balmanovigyan ka dhyan rakh kar kavita ko racha hai.
Manju Gupta.

rachana का कहना है कि -

आप बडो के लिए जिस सुन्दरता से लिखते हैं उसी सुन्दरता से बच्चों के लिए भी लिखते हैं
ये आप की खूबी है
बधाई
सादर
रचना

Shamikh Faraz का कहना है कि -

कंप्यूटर का खेल निराला
हर कोई जपता इसकी माला
मोबाइल जेब में सबने डाला
भैया, दीदी, मम्मी, खाला .

विज्ञानं के चमत्कार पर क्या खूब कविता लिखी आपने.

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