Friday, June 26, 2009

भोजन

भोजन से संसार
भोजन दे आधार .

भोजन को दो मान
गेहूँ हो याँ धान .

तरह तरह के भोज
चाहें सब हर रोज .

भूख से हो कर तंग
शिथिल हो जाते अंग .

भोजन मिले तो जान
तन में खिलते प्राण .

मत करना अपमान
भोजन है भगवान .

भोजन से अनजान
कोई नही इंसान .

मिले भोज दो वक्त
तन में बनता रक्त .

खेत जोते किसान
उसको दें सम्मान .

पेट जो खाली जान
भोजन देना दान .

भोजन है आधार
जग जीवन का सार .

कवि कुलवंत सिंह


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3 पाठकों का कहना है :

rachana का कहना है कि -

खेत जोते किसान
उसको दें सम्मान .
सही कहा किसान को सम्मान देना चाहिए भोजन देने वाला ही सबसे ज्यादा परेशानी में रहता है
सुन्दर कविता
सादर
रचना

Shamikh Faraz का कहना है कि -

खेत जोते किसान
उसको दें सम्मान .

जी कुलवंत जी बहुत अच्छी बात कही आपने. आम भाषा के शब्दों में एक सुन्दर कविता.

Manju Gupta का कहना है कि -

Gagar mein sagar bhar diya.
bhojan padhkar maja a gaya.

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