Thursday, January 28, 2010

ऐसा प्यारा सुखद पर्व २६ जनवरी

26 जनवरी 2010

२६ जनवरी,मंगलवार,हिंद युग्म संबाददाता
राष्ट्र पर्व का ध्वज आज मन को हर्षाता
आदर्श कुञ्ज, रोहिणी का यह सेक्टर १३
कैमरा मैन के साथ, सुबह-सुबह आ घेरा
अल्प सुबह भी, बावजूद गहरे कोहरे के
आते जाते सहस्र बाल जन हमने देखे
कॉलोनी के वरिष्ठ, सहर्ष फहराया तिरंगा
हुआ मिजाज आदर्श कुञ्ज,का रंग बिरंगा
सावधान सब खड़े, राष्ट्र की शान मान में
राष्ट्रगान की ध्वनि गूँज रही आसमान में
बावन सेकेण्ड का,आखों देखा हाल सुनो अब
दक्ष मुद्रा लिए खडे थे, जब सबके सब
एक बच्चे की पेंट खिसकती देखी नीचे
पोजीशन को चेंज किये बिन, कैसे खींचे
ऐनीवे, प्रिय राष्ट्रगान जब हो गया पूरा
शर्माते हुए उस बच्चे ने मुझको घूरा
प्रश्न राष्ट्र का हो तो सब कुछ अपना अर्पण
पेंट क्या.. यह सांस देश के हेतु समर्पण
खुशी खुशी यह जीवन अपना जाने देंगे
राष्ट्र आन पर कभी आँच ना आने देंगे
रंग बिरंगे परिधानों में बच्चे आये
वेस्ट से बने हुए कुछ बेस्ट नमूने लाये
देखो कुछ भी वेस्ट कहाँ है, भाई जग में
कितना कुछ है छुपा हुआ करने को सब में
डालो एक नजर चित्रों पर, लगे साथ में
छुपे हुए है कलाकार, बच्चों के हाथ में
कितना जज्बा,लगन,भरी कितनी उत्सुकता
रेडी..स्टेडी..कहते ही कोई उठ भगता
आखिर'गो'कर सकीं मेम दो चार बार में
दो बच्चे और टांग तीन दौड़े कतार में
लगी रेस बच्चों की देखो पैर बांधकर
आगे बढते होशियारी से साध-साध कर
बच्चों की मम्मियाँ भी कहाँ पीछे रहती है
छब्बीस,छत्तीस,छ्यालीश हों, १६ कहती हैं
अन्यंत्र नहीं लेना यह बात कहना अच्छा है
छुपा हुआ हर एक नारी नर में बच्चा है
माइक लेकर हाथ गजब पेट्रीयोटिक गाये
सुने सभी ने मंत्रमुग्ध हो कान लगाए
कौन सी मम्मी ज्यादा ज्यादा शब्द लिखेगी
२६ जनवरी की झलक जिन जिन में दिखेगी
किसी ने लिखे २ शब्द किसी ने पूरा एस्से
सभी को बहुत बधाई,लिखा सबने ह्रदय से
एक मम्मी ने शब्द, पूरे ग्यारह लिख डाले
हुई विजेता,फर्स्ट प्राइस कर लिया हवाले
पाकर के उपहार बहुत खुश बच्चे सारे
आनन्दित प्रफुल्लित थे, जीते या हारे
खेल भाव था, प्रश्न नहीं था हार जीत का
यही भाव रहे हर बच्चे में राष्ट्र प्रीत का
नहीं देख सकता तिरंगे को, कोई कुदृष्टि
यही प्रीत बन जायेगी फिर अग्नि-वृष्टि
ध्वज को देकर एक बार फिर पुनः सलामी
निकल पड़े करने को कार्य फिर कुछ आगामी
अथक प्रयास था इसके पीछे नीलम जी का
ह्रदय से आभार, मिला सहयोग सभी का
सुबह से लेकर शाम हुई बहतरीन मरमरी
ऐसा प्यारा सुखद पर्व २६ जनवरी
ऐसा प्यारा सुखद पर्व २६ जनवरी


जय हिंद-जय हिन्दी

- भूपेन्द्र राघव
दिल्ली-हिन्द युग्म

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2 पाठकों का कहना है :

neelam का कहना है कि -

प्रश्न राष्ट्र का हो तो सब कुछ अपना अर्पण
पेंट क्या.. यह सांस देश के हेतु समर्पण
खुशी खुशी यह जीवन अपना जाने देंगे
राष्ट्र आन पर कभी आँच ना आने देंगे

raghav ji kya khoob gaagar me saagar bhar diya hai ,shukriya dil ki aakhiri tah se .(aapka hi andaaj hai ,hahahahahhaha )

tapan tum to achche bachche ho hi ,yah hmare baal-dyaan ka sabse bada aur samjhdaar bachcha hai .photo me gaur se dekhiye ise .

shanno का कहना है कि -

अरे वाह! मैंने कभी सोचा भी नहीं था की आप सबके अथक प्रयास से हिन्दयुग्म पर २६ जनवरी को बाल उद्यान के लिये इतना सुंदर प्रोग्राम होगा. इतनी प्यारी तस्वीरें भी देखने को मिलीं. तस्वीरों में सब कोट व स्वेटर से लदे हुये हैं. इन तस्वीरों में भारत में ठण्ड के समय बच्चों व बड़ों को उस वातावरण में देखकर अपने बचपन व स्कूल की बड़ी याद आई. ऐसे ही गर्म कपडे लादकर अपना बस्ता ढोते हुये हम मुँह से भाप निकालते हुये स्कूल जाते थे. इतने बच्चों के बीच अपनी जान पहचान की नीलम जी, पाखी व दीपक जी को देखकर बड़ी ही ख़ुशी हुयी. सबको मेरी शुभकामनायें.

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