Monday, January 18, 2010

मेरी पहचान


मेरी पहचान
दो आंखें और दो ही कान
एक नाक मेरी पहचान
दो बाहें और दो ही हाथ
मिलकर काम करें ये साथ
सिर पर भूरे लम्बे बाल
चिकने चिकने मेरे गाल
दो टांगें और दो ही पैर
भागुं जिससे लगे न देर


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2 पाठकों का कहना है :

डा० डंडा लखनवी का कहना है कि -

आदरणीय सुश्री सीमा सचदेवा जी!
नमस्कार!
आपका ब्लाग ‘बाल उद्यान’ का अवलोकन किया और आपकी कविता पढ़ी ‘मेरी पहचान’ पढ़ कर प्रसननता हुई। अभी ब्लागिंग में मैं नवागंतुक हँू। इसके संचालन के गुर सीख लूँ तत्पश्चात उसके बाद ‘बाल उद्यान’ से जुड़ता हँू।
सद्भावी
डा0 डंडा लखनवी

shanno का कहना है कि -

सीमा जी,
वाह! कितनी सुन्दर तस्वीरें हैं नवजात शिशुओं की. कविता भी प्यारी सी है.

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