Thursday, September 10, 2009

बारिश बरसे




टप, टप, टप, टप, टपप, टपप,
बारिश बरसे टप, टप, टप,
गरजे बदरा घनन, घनन,
बिजली चमके शनन, शनन।

देख के बारिश की बौछार,
झूमें पौधे बारम्बार,
सूखे से छुटकारा मिला है,
नदियाँ भी मारें फुँकार

चहुँ और हरियाली बिछी है,
ठंडी हवा की धूम मची है,
कोयल मीठे गान सुनाये,
जंगल में मंगल की घड़ी है ।

मोर खुशी से नाच दिखाये,
बगिया भी है फूल खिलाये,
आओ, हम सब हाथ पकड़ कर,
झूमें, नाचें, मौज मनायें ।

--डॉ॰ अनिल चड्डा


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8 पाठकों का कहना है :

sangita puri का कहना है कि -

सुंदर बाल गीत !!

अनिल कान्त का कहना है कि -

बहुत अच्छा लगा ये बाल गीत

seema gupta का कहना है कि -

सुंदर मनभावन बाल कविता,,...
regards

Manju Gupta का कहना है कि -

कविता पढ़ते ही रिमझिम शुरू हो गयी .. सुंदर बारिश गीत है .आभार .

Vinay का कहना है कि -

सुन्दर कविता है
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Tech Prevue: तकनीक दृष्टा

Shamikh Faraz का कहना है कि -

सुदर अभिव्यक्ति चड्डा जी.

मोर खुशी से नाच दिखाये,

बगिया भी है फूल खिलाये,

आओ, हम सब हाथ पकड़ कर,

झूमें, नाचें, मौज मनायें ।

Kavi Kulwant का कहना है कि -

sundar baal geet...manabhawan..

डॉ० अनिल चड्डा का कहना है कि -

आप सबको मेरी रचना पसन्द आई, बहुत-बहुत धन्यवाद । प्रोत्साहन के लिये आभार ।

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