Wednesday, November 18, 2009

चित्र आधारित बाल-कविता प्रतियोगिता में भाग लीजिए

प्रिय साथियो,

बाल-उद्यान पर हम आज से कविता-प्रतियोगिता शुरू कर रहे हैं। आप इस चित्र पर हमें प्यारी सी मगर छोटी बाल-कविता लिख कर प्रेषित करें। आप कविता baaludyan@hindyugm.com पर भेज सकते हैं। कविता भेजने की अंतिम तिथि- 26 नवम्बर 2009 है।

अधिक से अधिक संख्या में भाग ले कर इस प्रतियोगिता को सफल बनाने में हमारा योगदान करें। कविता पहले से कही भी प्रकाशित न हो, इस बात का ध्यान अवश्य रखें।


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7 पाठकों का कहना है :

विनोद कुमार पांडेय का कहना है कि -

badhiya vichar sarahniy kadam ..baal kavita ke liye mai nischit rup se pryaas karunga..dhanywaad

श्याम सखा 'श्याम' का कहना है कि -

इसे ऐसे होना चाहिये

प्रिय साथियो,
बच्चों से .....आप इस चित्र पर हमें प्यारी सी मगर छोटी बाल-कविता लिखवा कर प्रेषित करें।

बाल-उद्यान पर हम आज से कविता-प्रतियोगिता शुरू कर रहे हैं। आप कविता

neelam का कहना है कि -

shyaam ji ,
koi umr seema tay nahi ki hai hmne kyonki yah manch 8 saal se lekar 80 saal tak ke bachchon ke liye hai ,aur aapki kavita bhi saadar aamantrit hai.kyonki hmaari jankaari ke mtaabiq aap bhi isi umr seema me hi aate hain ,aate hain naa ?????

©डा0अनिल चडड़ा(Dr.Anil Chadah) का कहना है कि -

नीलमजी,

हम भी 57 वर्षीय बच्चे ही हैं । कोशिश करेंगें रोने की । हा…हा…हा…

neelam का कहना है कि -

aap to bade bachche hain to aap ko rona nahi ,rote hue bachche ko chup karaane ka prayaas kijiye to baat ban jaayegi .

shanno का कहना है कि -

वाह भई वाह! मेरे आँख से ओझल होने के पहले ही मुझे बाल उद्यान से बेदखल किया जा रहा है (हा....हा). यह तो बड़ी अन्याय वाली बात है. हम तो डटे रहेंगे मैदान में मोर्चा लेने के लिये. वो क्या कहते हैं की: 'बुढ़ापा तो बचपन का दूसरा नाम है'. धन्यबाद नीलम जी मुझे बचाने के लिये. मैं तो बस रोने ही वाली थी.....मेरा दिल टूट गया था कुछ देर के लिये. अब सजा के तौर पर अंकल श्याम जी को भी एक कविता इस चित्र पर लिखने को कहिये ना...कहिये ना.....नीलम जी आप सुनती क्यों नहीं हैं? वरना फिर हम आपसे कुट्टी करके छुट्टी पर जा रहे हैं.

neelam का कहना है कि -

शन्नो जी कोई कुट्टी मत करिए
श्याम अंकल ने आपकी फरमाईश
पढ़ ली है .

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