Friday, November 13, 2009

पुनरावृत्ति -मुहावरों की (आम के आम गुठलियों के दाम )


आज एक नई कक्षा की शुरूआत की जा रही है। आप सब ने मुहावरों को तो पढ़ा ही होगा, तो आज हम सब लोग करेंगे रिविजन और वापस पहुंचेंगे अपने बचपन में। थोड़ी सी मेहनत करनी होगी। पर आप सब को इसमें बहुत आनंद आने वाला है, इसका पूरा आश्व्वाशन हम आपको देते हैं।

नियम कुछ इस प्रकार हैं -

१)आपको कुछ शब्द दिए जायेंगे उन शब्दों से आपको एक मुहावरा बताना है।

सबसे पहले मुहावरा बताने वाले को 1 अंक मिलेगा और उसके वाक्य प्रयोग को 1 अंक यानी कुल 2 अंक

२)एक शब्द से कई दूसरे मुहावरे भी लिखे जा सकते हैं और वाक्य प्रयोग कर सकते हैं।

३)सबसे अच्छे वाक्य को 1 और अतिरिक्त अंक मिलेगा।

४)उसके बाद तो आपको पता ही है, आप सबको मिलेंगे अनूठे खिताब आपकी कक्षा अध्यापिका व मॉनिटर द्वारा (शन्नो जी यह प्रतियोगिता सिर्फ़ आपके लिए नही है आपको अपना काम बखूबी पता है)।

आज की प्रतियोगिता के शब्द हैं-

सिर

आँख

कान

कन्धा

घुटना

तो है न मजेदार बस दिमाग को थोडी कुश्ती करानी होगी (हा हा हा हा हा)


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10 पाठकों का कहना है :

shanno का कहना है कि -

मुझे अच्छी तरह पता है की यह प्रतियोगिता 'सिर्फ' मेरे लिये नहीं है ( हा, हा ).....मैं इतनी वेवकूफ नहीं हूँ. मुझे तो सबके उत्तरों की जांच-पड़ताल करनी है. सो चैन की साँस खींचकर जा रही हूँ कुछ देर के लिये. लेकिन आपकी तरह अपनी भी आँखें देखती रहती हैं की क्या हो रहा है बाल-उद्यान पर या इधर-उधर. तो फिर देखते हैं बच्चों की होशियारी आज.

dschauhan का कहना है कि -

१- सिर- सिर फक्र से ऊंचा होना
(जब भी मेरे बच्चे कक्षा में टाप ५ में आते तो मेरा सिर फक्र से ऊंचा हो जाता है!)

२- आँख- आँख का पानी मरना -
(आज की दुनिया में कुछ लोगों की आँख का पानी मर गया है और वह सरे आम अपने बुजुर्गों की इज्ज़त नहीं करते हैं!)

३- कान- कान पर जूं न रेंगना-
(राज ने जब अपने बेटे से कई बार पानी माँगा तब भी उसके कान पर जूं नहीं रेंगा!)

४- कन्धा- कंधे से कन्धा मिलकर चलाना _
(आजकल की महिलायें पुरुषों के साथ कंधे से कन्धा मिल!कर चलने की सफल कोशिश कर रही हैं!)

५- घुटना- घुटने टेक देना -
(अक्सर हम पति लोग अपनी पत्नियों के आगे अपने घुटने टेक देते हैं!)

तपन शर्मा का कहना है कि -

मुझे लगा कि सभी शब्दों का इस्तेमाल कर एक मुहावरा बनाना है...

sumit का कहना है कि -

mujhe bhi aisa he laga ki sabhi shabdo ke istemaal se ek muhawra banana hai........

sumit का कहना है कि -

sir- yaad nahi.....
aankh- aankh ka taara hona.....
kaan- kaan katarna..pata nahi ye koi muhawra hai ya nahi aise he tukka maara hai..
kandha-yaad nahi aa raha...
ghutna- yaad nahi aa raha...

sumit का कहना है कि -

ab वाक्य बनाने की बारी........
कान- कान कतरना -बिल्ली के कान चूहों के द्वारा कतरे गए

sumit का कहना है कि -

ab वाक्य बनाने की बारी........
कान- कान कतरना -बिल्ली के कान चूहों के द्वारा कतरे गए

manu का कहना है कि -

jiske 'sir; topi saje...
aankh pe chashmaa sohe .....

ghutnaa kandhaa kaan sab...
''hindi-yugm'' kaaa hoye....

neelam का कहना है कि -

अनुशासनहीनता की पराकाष्ठा ,कोई कुछ ,कोई कुछ कह रहा है ,टोपी वाले को बताईये शन्नो जी ये दोहे की नहीं मुहावरों की कक्षा है ,कहाँ हैं शंनोजी आप बचाईये इन मनमौजियों से अपने बाल - उद्यान को .अब आप समझा ही दीजिये इन सबको
पहली कक्षा है आते ही हुडदंग शुरू हो गया है

shanno का कहना है कि -

शाबाश चौहानजी!! GOOD BOY.
सबसे पहले तो चौहान जी को बधाई जिन्होंने न केवल पाँचों शब्दों के मुहावरे बताये बल्कि उनसे वाक्य भी बना कर दिये....और सबसे पहले कक्षा में भी उपस्थिति हुये. आप सबसे अधिक अंक के हकदार हैं. आपने कक्षा अध्यापिका नीलम जी (और मेरा भी) सर फख्र से ऊंचा कर दियाहै. तो आपको मिलते हैं कुल मिलाकर ७ अंक:
१. एक अंक कक्षा में सबसे पहले आने के लिये
२. एक अंक सबसे पहले मुहावरा बताने के लिये
३. और फिर पाँचों मुहावरे सही होने से उनके भी पांच अंक
और अब अन्य बच्चों ने भी कक्षा में आने की दिलचस्पी ली है तो वह सभी प्रशंशा के हकदार हैं.....चाहें वह टोपी पहन के आयें या नहीं (हा, हा).
तपन जी ने भी अपना दिमाग कुछ खुजाया है तो उसके लिये उन्हें बहुत धन्यबाद और उन्हें एक अंक दिया जाता है. और सुमीत जी..वाह! दो ही शब्दों के मुहावरे बताये हैं आपने पर बिलकुल सही. तो दो मुहावरों पर आपको २ अंक मिलते हैं.
और भी कुछ सूचना देनी है ( बिना नीलम जी की आज्ञा से) की बाल-उद्यान पर पढ़ना और मौज मस्ती सब चलता है. बस यहाँ बच्चों को पढ़ाने के तरीके बदल गये हैं. कुछ बच्चे जिन्होंने दोहे सीखे हैं वह उस स्टाइल में लिखने के शिकार हो गये हैं और अपने तरीके से ही बातचीत करने के आदी हैं. पर उन्होंने सभी शब्दों का प्रयोग किया है. तो उन सभी शब्दों को इस्तेमाल करके अपने ऊपर ही एक अनोखा मुहावरा (खुद को चलता-फिरता मुहावरा बनाया है) बनाने के लिये मनु जी को भी ५ अंक मिलते हैं.
तो ख़ुशी की बात है की इस कक्षा में किसी ने भी अपने घुटने नहीं टेके, ना ही किसी ने किसी की आँखों में धूल झोंकी, सभी ने मुहावरों को बनाने में एक दूसरे के कान काटने की कोशिश की, अपने कन्धों पर पड़ा गृह-कार्य का भार संभाला और गधे के सर से सींग की तरह कक्षा से गायब होने की कोशिश नहीं की.
अगली कक्षा में भी आप लोग उपस्थिति होने का कष्ट करें. खुद भी और साथ में औरों को भी लायें. नीलम जी बराबर शिक्षाप्रद बातों के साथ मनोरंजक तरीके से समय-समय पर उपस्थित होती रहेंगीं.

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