Thursday, December 17, 2009

चित्र आधारित प्रतियोगिता के परिणाम और पहली कविता

पिछले महीने बाल-उद्यान ने चित्र आधारित बाल-कविता लेखन की प्रतियोगिता आयोजित की थी। इसमें कुल 10 कवियों ने भाग लिया। इस प्रतियोगिता में एक तेरह वर्षीय किशोर कवि जॉय चड्डा ने भी भाग लिया। सर्वश्रेष्ठ कविता का निर्णय नीलम मिश्रा और पूजा अनिल किया और भूपेन्द्र राघव की कविता को सर्वश्रेष्ठ स्थान पर रखा। बधाई!

दूसरा स्थान- सीमा सचदेव
तीसरा स्थान- डॉ॰ अनिल चड्डा
अन्य प्रतिभागी- श्याम सखा श्याम, जॉय चड्डा, शन्नो अग्रवाल, सुजान पंडित, देवेन्द्र सिंह चौहान, मंजू गुप्ता, पुरूषोत्तम अब्बी।

हम एक-एक करके सभी कविताएँ प्रकाशित करेंगे। आज प्रस्तुत है, पहली कविता।

चाचू लाये चाल खिलोने
बहुत प्याले बहुत छलोने
दो मैंने लिए, दो लिए भाई
किछी बात की नहीं ललाई
मैंने चुन लिए बस, स्कूतल
भाई ने लिए मोल, कबूतल
भाई मुझको लगा चिढाने
ओल कबूतल को छ्म्झाने
मेले कबूतल उल कल जाना
मीथे मीथे फल तुम लाना
मैं भी छाले फल खा लूंगा
ऑल किछी को एक न दूंगा
इतने में एक बिल्ली आई
झट पीजन पल जम्प लगाई
मैं बोली, लो उल गया कबूतल
खूब मिलेंगे अब मीथे फल
पीजन ले गयी बिल्ली मांछी
भाई की छूलत हुई लुआंछी
भाई पे लह गया एक खिलौना
छुलू हो गया इनका लोना
चीक्स पल बहकल आये आंछू
देखकल मैं भी हुई लुआंछू
गले भाई के लगकल बोली
मेले भैया आई ऍम छौली..
मुझछे ले लो एक खिलौना
बंद कलो बछ अपना लोना
चलो भाई ये दोनों ले लो
बछ मेले छंग मिलकल खेलो
गले भाई ने लगाया कछ्कल
आई ऍम छोली बोले हंछकल
चाल खिलोने लह गए तीन
अन्फोरगेतेबल, व्हात ए छीन |

--भूपेन्द्र राघव

संपादकीय टिप्पणी- राघव की कविता हमें सबसे अच्छी लगी, क्योंकि बच्चों में समाये उन मानवीय मूल्यों को दर्शाती है जो बड़े भी भूल चुके हैं (हालांकि इनकी कविता तोतली बोली में है, फिर भी अपना सन्देश पूर्ण तौर पर संप्रेषित करती है और गेय कविता है)।


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6 पाठकों का कहना है :

सीमा सचदेव का कहना है कि -

भैया लाघव बली बधाई
सुन्दल कविता हमें शुनाई
पुलस्काल जब लेकल आना
लाकल हमको भी दिखाना
खेलेंगे फ़िल मिलकल शाथ
दे देना वो मेले हाथ
मैं न उसे कभी तोलुंगी
झूथ नहीं शच शच बोलुंगी
ले लेना चाहे कोई खिलौना
पुलस्काल पल मुझको देना

rachana का कहना है कि -

aap sabhi ko badhai
kavita bahut sunder hai totli bhasha me hai is liye mujhe aur bhi acchhi lagi
saader
rachana

©डा0अनिल चडड़ा(Dr.Anil Chadah) का कहना है कि -

तोतली भाषा में कविता पढ़ कर अच्छा लगा । परन्तु डर है हम भी तोतली भाषा न बोलने लगें ।

neelam का कहना है कि -

laaghav uncle, what a unforgetable seen bahut achcha laga .

Sujan Pandit का कहना है कि -

Tutli rachna achhi lagi - BADHAI

भूपेन्द्र राघव । Bhupendra Raghav का कहना है कि -

mam hridya gad-gad bhayo
dekh sakal jan pyaar....
abhilasha ab kaun ki
mile koi uphaar.........

chaaha saraha likh diyaa
bahut bahut aabhaar.....
yahu ichchaa atript hai..
maangu haath pasaar......

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