Friday, February 8, 2008

लक्ष्य से जीत तक ( भाग - 2 )

5. आलस्य - आलस्य को कभी अपने ऊपर हावी मत होने दो । कबीर की ये पंक्तियां तो हम सभी के मुंह पर रहती हैं - काल करे सो आज कर । और यह मत सोचो कि आपका काम कोई दूसरा कर देगा । राबर्ट कैलियर ने कहा था - मनुष्य के सर्वोत्तम मित्र उसके दो हाथ हैं । अपने इन हाथों पर भरोसा रखो एवं सतत प्रयत्नशील रहो ।
6. निंदा/ बुराई - जब हमने लक्ष्य ठान लिया है, कर्म कर रहे हैं, अवसरों का उपयोग कर रहे हैं, निराशा से बच रहे हैं, सतत आगे बढ़ रहे हैं तो राह में हमें कई प्रकार के लोग मिलते हैं । हमारे विचार, दृष्टिकोण, लक्ष्य परस्पर टकराते हैं। लेकिन हमें एक चीज से बचना है । दूसरों की बुराई से, उनकी निंदा से । रिचर्ड निक्शन ने कहा था - निंदा से तीन हत्याएं होती हैं; करने वाले की, सुनने वाले की और जिसकी निंदा की जा रही है । स्विफ्ट ने कहा था - आदमी को बदमाशियां करते देख कर मुझे हैरानी नही होती है, उसे शर्मिंदा न देखकर मुझे हैरानी होती है। इसलिए आवश्यक है कि हम अपनी गलतियों को सहर्ष कबूलें । हम इंसान हैं, हमसे गलतियां भी होंगी। लेकिन गलती को मान लेना सबसे बड़ा बड़प्पन है । और इन गलतियों से सीख लेते हुए हमें आगे बढ़ना है ।
7. परोपकार - हमारे लक्ष्य, हमारे कर्मों में कहीं न कहीं परोपकार की भावना अवश्य होनी चाहिए। चाहे वह हमारे समाज, जाति, देश, धर्म, परिवार, गरीबों के लिए हो । परोपकार की भावना जितने बड़े तबके के लिए होगी आप उतने ही महानतम श्रेणी में गिने जाएंगे । गांधी जी ने कहा था - जिस देश में आप जन्म लेते हैं, उसकी खुश हो कर सेवा करनी चाहिए । तुलसीदास जी ने कहा है - परहित सरिस धर्म नहि भाई । नेहरू जी ने भी कहा था - कार्य महत्वपूर्ण नही होता, महत्वपूर्ण होता है - उद्देश्य; हमारे उद्देश्यों एवं कर्मो के पीछे परोपकार की भावना निहित होनी चाहिए ।
8. जीत - आपने लक्ष्य ठाना; कर्म कर रहे हैं; अवसरों का उपयोग कर रहे हैं; निराशा, आलस्य और निंदा से बच रहे हैं; परोपकार की भावना से निहित हैं । बस एक ही चीज अब बचती है । जीत । जीत निश्चित ही आप की है । ऋग्वेद में भी लिखा है - जो व्यक्ति कर्म करते हैं, लक्ष्मी स्वयं उनके पास आती है, जैसे सागर में नदियां ।
जो इन सब पर चलते हैं, असाध्य कार्य भी संभव हो जाते हैं । दो उदाहरण देना चाहता हूँ -
1. एक गुरू ने अपने शिष्यों को बांस की टोकरियां दी और कहा कि इनमें पानी भर कर लाओ। सभी शिष्य हैरान थे, यह कैसा असंभव कार्य गुरूजी ने दे दिया । सब तालाब के पास गए । किसी ने एक बार, किसी ने दो बार और किसी ने दस बीस बार प्रयत्न किया । कुछ ने तो प्रयत्न ही नही किया । क्योंकि पानी टोकरी में डालते ही निकल कर बह जाता था। लेकिन एक शिष्य को गुरू पर बहुत आस्था थी, वह सुबह से शाम तक लगातार लगा रहा। प्रयत्न करता रहा। शाम होते होते धीरे धीरे बांस की लकड़ी फूलने लगी और टोकरी में छिद्र छोटे होते गए और धीरे धीरे बंद हो गए। इस तरह टोकरी में पानी भरना संभव हो सका ।
2. 1940 के ओलंपिक खेलों में शूटिंग के लिए सभी की नजरें हंगरी के कार्ली टैकास पर टिखी थीं; क्योंकि वह बहुत अच्छा निशाने बाज था । लेकिन विश्वयुद्ध छिड़ गया । 1944 में भी विश्वयुद्ध के चलते ओलंपिक खेल नही हो पाए । विश्वयुद्ध तो समाप्त हो गया लेकिन 1946 में एक दुर्घटना में कार्ली का दायां हाथ कट गया । जब हाथ ही नही तो शूटिंग भला कैसी ? कार्ली ने घर छोड़ दिया । सबने सोचा निराशा के कारण कार्ली ने घर छोड़ दिया है । लेकिन जब 1948 में लंदन में ओलंपिक खेल हुए तो सबने हैरानी से देखा कि शूटिंग का गोल्ड मैडल लिए कार्ली खड़ा है। बाएं हाथ से गोल्ड मैडल जीता ।
9. अहंकार - जीत आपने प्राप्त कर ली । अब एक बात का और ध्यान रखना है । कभी अहंकार को अपने ऊपर हावी नही होने देना है । अहंकार मनुष्य के विनाश का कारण बनता है। सहजता और सौम्यता बड़प्पन के गुण हैं । शेक्सपीयर ने कहा था - अहंकार स्वयं को खा जाता है । अपनी दो पंक्तियों के साथ -
हिम बन चढ़ो शिखर पर यां मेघ बन के छाओ,
रखना है याद तुम्हे सागर में तुमको मिलना ।

कवि कुलवंत सिंह
वैज्ञानिक अधिकारी
भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र, मुंबई


आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)

6 पाठकों का कहना है :

SURINDER का कहना है कि -

कुलवंत जी, बहुत ही अच्छे विचार है, हर आदमी अगर इस तरह से सोचे काम क्रोध मोह अंहकार को छोड दे, विजय प्राप्त कर ले, जीवन स्वर्ग हो जाएगा. शुभकामनाये - सुरिंदर रत्ती

शोभा का कहना है कि -

कुलवन्त जी
बहुत ही प्रभावी और उपयोगी जानकारी दी है आपने। हम सभी को इन बातों पर विचार करना चाहिए। आशा है हमारी नई पाढ़ी को दिशा निर्देश मिलेगा । बधाई स्वीकारें ।

Bhupendra Raghav का कहना है कि -

कुलवंत जी,

युग-निर्माण के लिये युव-निमार्ण आवश्यक और युव-निर्माण के लिये आपकी बातें अति उपयोगी...

बहुत बहुत साधूवाद..

Alpana Verma का कहना है कि -

जीवन में सफल होने के लिए क्या क्या करना चाहिये यह जानकारी और सुझाव लिए हुए प्रस्तुत पाठ बहुत ही उपयोगी है

sahil का कहना है कि -

अच्छी जानकारी,धन्यवाद
आलोक सिंह "साहिल"

आलोक शंकर का कहना है कि -

हिन्द युग्म के 'राष्ट्र निर्माण' के लक्ष्य के लिये सबसे मजबूत बुनियाद ऐसे ही बनेगी । साधुवाद ।

आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)