Tuesday, February 5, 2008

चाकलेट है मेरा नाम [दीदी की पाती ]





नमस्ते ,
हर पाती में मेरी कोशिश होती है आपको नई बात बताने की ...अच्छा चाकलेट किसको अच्छी नही लगती ? हाँ हाँ मुझे मालूम है की सबको बहुत अच्छी लगती है ..मुझे भी बहुत अच्छी लगती है ...कितनी खा लो फ़िर भी दिल नही भरता न ...यह है ही ऐसी प्यारी मीठी सी चीज ..जो बड़े ,बच्चो सबको पसंद है ...जब मैं बहुत छोटी थी तो सपने में देखती थी सब पेड़ चाकलेट से लदे हैं और बस मैं उनको तोड़ती जाती हूँ और खाती जाती हूँ .:) पर बाद में मैंने जाना की यह सपना सच ही है ..क्या आपको पता है कि
जो चाकलेट आप खाते हैं या पीते हैं ..वह आती कहाँ से है ? आज मैं आपको इस कविता के माध्यम से बताती हूँ चाकलेट बनने कि कहानी ...


-- चाकलेट है मेरा नाम
हूँ सबकी लबों की मुस्कान
गरम देश में पैदा होती हूँ
ककाओ है मेरे पौधे का नाम

साल भर रहता यह पौधा हरा - भरा
साल में दो बार इस पर पीला फूल खिला
इन फूलों से बन जाती फिर फलियाँ
हर फली में रहती है बीजों की लड़ियाँ

तोड़ फली को फिर पत्तियों से अलग कर जाते
कुछ दिन में इसका छिलका हैं निकलते
बीज इस में निकलते हैं फ़िर सुनहरे
फिर बीजों को भून के पिसे जाते

यही पीसा चूरा ही है चाकलेट कहलाता
खाने और पीने के काम आता
कभी भर देते इस में मेवे
कभी इसको पिया जाता
सबके दिल को भाती चाकलेट
मीठी मीठी सबकी दुलारी चाकलेट !!

तो पढ़ा आपने चाकलेट बनने की कहानी को .भाई अब मेरे से तो रुका नही जा रहा ..मैं तो खाने लगी हूँ ढेर सारी चाकलेट ..आप भी खाओ ..पर हाँ अपने दातों का ध्यान रखना .

आपकी दीदी

रंजू


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3 पाठकों का कहना है :

seema gupta का कहना है कि -

अच्छा चाकलेट किसको अच्छी नही लगती ?
" सुबह सुबह मुह मे पानी आ गया औब क्या करू, चाकलेट मेरी कमजोरी है , और चाकलेट के बारे मे जानकारी देने का शुक्रिया"
Regards

Bhupendra Raghav का कहना है कि -

चाकलेट सब बाँट लीं जो मैं आया कुछ लेट
ललचाते मैं रह गया, सब ने भर लिया पेट..
मुझे बता दो किसने खाया, भाई मेरा हिस्सा..
वरना सातवें आसमान पर होगा मेरा गुस्सा..
सबकी मम्मी से जाकर मैं सबकी शिकायत लगाऊँगा
और जरा सी भी नहीं दुँगा जब में चाकलेट खाऊँगा
मिल-बाँटकर चीजें खाना, टीचर ने बतलाया था..
फिर यूँ अकेले चट करने का किसके दिमाग में आया था..


.. हम नही बस..हम नहीं...ये भी कोइ बात होती है जाओ कट्टी 100 साल की..

श्रीकान्त मिश्र 'कान्त' का कहना है कि -

चाकलेट के नाम से किसके मुंह में पानी नहीं आ जाता भाई मेरे भी और चाकलेट की जानकारी मिलने के बाद तो यह और भी स्वादिष्ट हो गई है. इस रचना के माध्यम से इतनी सारी जानकारी बच्चों को देने के लिए साधुवाद

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