Monday, February 4, 2008

कविताएँ

(1)
बस्तर
छत्तीसगढ के दक्षिण में बसा है बस्तर
आओ चलकर देखें क्या है इसके अंदर
ऊँची-नीची पहाडी और बडी-बडी घाटी
नदियाँ है गहरी ,पावन यहाँ की माटी

काँगेर घाटी में देखो,बनभैंसों की टोली
राज्य पक्षी मैना की आदमी सी बोली
चित्रकोट तीरथगढ सुंदर यहाँ झरना
कोटमसर की गुफा से तुम न डरना

शाल और सागौन वनों से गुजरती
बहती है इंद्रावती खेतों को सींचती

बैलाडिला पहाड पर लोहे की खान
इसी से इतराता है देखो ये जापान
जंगलों में खेलते हैं अधनंगे बच्चे
यहाँ के लोग हैं सीधे और सच्चे

बस्तर में लगतें हैं,हाट और बाजार
अनूठी संस्कृति, तीज और त्यौहार
शल्फी और ताडी बस्तर की ठंडाई

ताड तेंदु छिंद महुआ सुंदर मिठाई
शंखनी-डंकनी का संगम अति पावन
सबकी आस्था माँ दंतेश्वरी मनभावन
आमफल जामफल सीताफल रामफल
इनको खाकर ही बच्चे होते पहलवान

लोहे शिल्प और लकडी पर चित्रकारी
इस पर भी भूखी मरे बुधनी बेचारी
चटनी-बासी तीखुर मडिया यहाँ के पकवान
हमारे लिए तो देवी देवता होते हैं मेहमान
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डॉ. नंदन , बचेली, बस्तर (छ.ग.)
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(2) महात्मा गाँधी की याद में...............

स्वराज्य प्राप्ति में बापूजी का, है अपना अनुपम स्थान,
राष्ट्र हेतु संघर्ष किया , फिर महाप्राण का महाप्रयाण।

सत्य अहिंसा के रक्षक थे , मानवता के संस्थापक,
भेदभाव से रहित थे वे, और वर्ण-जाति के आलोचक ।
सब हैं एक भगवान की संतान,था उनका कथन महान,
राष्ट्र हेतु संघर्ष किया फिर महाप्राण का महाप्रयाण ।

विश्व शांति का अलख जगाया, भाईचारे को अपनाया ।
सभी एक हैं भेदभाव क्यों, प्रश्न ये मन में उपजाया ।
जीवन था आदर्श हमेशा , आज भी है आदर्श महान ।

राष्ट्र हेतु संघर्ष किया , महाप्राण का महाप्रयाण ।
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अलंकृति शर्मा
कक्षा- आठवीं
केन्द्रीय विद्यालय बचेली (बस्तर)
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4 पाठकों का कहना है :

seema gupta का कहना है कि -

राष्ट्र हेतु संघर्ष किया फिर महाप्राण का महाप्रयाण ।
विश्व शांति का अलख जगाया, भाईचारे को अपनाया ।
सभी एक हैं भेदभाव क्यों, प्रश्न ये मन में उपजाया ।
जीवन था आदर्श हमेशा , आज भी है आदर्श महान ।
राष्ट्र हेतु संघर्ष किया , महाप्राण का महाप्रयाण ।
"अलंकृति शर्मा बहुत खूब बेटा , बहुत अच्छी कवीता लिखी है आपने, लिखते रहें , आगे के लिए शुभकामनाएं"

रंजू का कहना है कि -

बहुत सुंदर कविता लगी यह ..नंदन जी


अलंकृति आपने बहुत ही प्यारी कविता लिखी है ..लिखती रहे आगे भी .बधाई आपको !!

tanha kavi का कहना है कि -

बैलाडिला पहाड पर लोहे की खान
इसी से इतराता है देखो ये जापान

बहुत खूब नंदन जी। बस्तर के बारे में इतनी सारी बातें बताने के लिए आपका बहुत-बहुत शुक्रिया। इस प्यारी रचना के लिए बधाई स्वीकारें।

स्वराज्य प्राप्ति में बापूजी का, है अपना अनुपम स्थान,
राष्ट्र हेतु संघर्ष किया , फिर महाप्राण का महाप्रयाण।

अलंकृति! तुमने इन दो पंक्तियों में हीं सारा इतिहास कह डाला है। आठवीं कक्षा में हीं तुम इतना अच्छा लिख लेती हो। मुझे तुम्हारा भविष्य बहुत हीं चमत्कृत नज़र आ रहा है। बधाई स्वीकारो।

-विश्व दीपक ’तन्हा’

राजीव रंजन प्रसाद का कहना है कि -

डॉ. नंदन,

आपकी कविता तो बेहतरीन है ही, अलंकृति की कविता नें भी बाल-उद्यान में चार चाँद लगा दिये हैं।

*** राजीव रंजन प्रसाद

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