Friday, February 15, 2008

साथी बढ़ते जाना

साथी बढ़ते जाना ।
हाथ पकड़ कर इक दूजे का,
साथी बढ़ते जाना । साथी .....

संकट कितने ही आएं,
इनसे न घबराना ।
साथी बढ़ते जाना । साथी .....

मंजिल दूर भले हो कितनी,
मिलकर कदम बढ़ाना ।
साथी बढ़ते जाना । साथी .....

पथ में चलते हार गए जो,
उनको गले लगाना ।
साथी बढ़ते जाना । साथी .....

कंटक कितनी ही पीड़ा दें,
आँसू न कभी बहाना ।
साथी बढ़ते जाना । साथी .....

रोशन हो यह जग सारा,
सूरज नया उगाना ।
साथी बढ़ते जाना । साथी .....

कवि कुलवंत सिंह


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9 पाठकों का कहना है :

रंजू का कहना है कि -

मंजिल दूर भले हो कितनी,
मिलकर कदम बढ़ाना ।
साथी बढ़ते जाना ।

सुंदर बाल कविता बधाई कुलवंत जी

अजय यादव का कहना है कि -

मंजिल दूर भले हो कितनी,
मिलकर कदम बढ़ाना ।
साथी बढ़ते जाना ।

इस संदेश व मानसिकता की आवश्यकता सारे संसार को है. इतने सुंदर ढंग से एक बहुत सुंदर संदेश देने लिये बधाई स्वीकारें.

Bhupendra Raghav का कहना है कि -

कवि जी,

पथ में चलते हार गए जो,
उनको गले लगाना ।
साथी बढ़ते जाना । साथी .....

कंटक कितनी ही पीड़ा दें,
आँसू न कभी बहाना ।
साथी बढ़ते जाना । साथी .....

रोशन हो यह जग सारा,
सूरज नया उगाना ।
साथी बढ़ते जाना । साथी .....

बढ़िया, सुन्दर कविता

अवनीश एस तिवारी का कहना है कि -

सुंदर है |
बधाई


अवनीश तिवारी

Udan Tashtari का कहना है कि -

बहुत बढ़िया, बढ़िया कविता..बधाई.

seema gupta का कहना है कि -

कंटक कितनी ही पीड़ा दें,
आँसू न कभी बहाना ।
साथी बढ़ते जाना । साथी .....

रोशन हो यह जग सारा,
सूरज नया उगाना ।
साथी बढ़ते जाना । साथी .....
सुंदर बाल कविता बधाई स्वीकारें.
Regards

sahil का कहना है कि -

रोशन हो यह जग सारा,
सूरज नया उगाना ।
साथी बढ़ते जाना । साथी
अच्छी कविता.बधाई हो
आलोक सिंह "साहिल"

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ का कहना है कि -

कुलवंत जी, आपकी कविता वाकई प्रेरणादायक है। बहुत-बहुत बधाई।

आलोक शंकर का कहना है कि -

कवि जी,
इस कविता में दिनों तक छाये रहने की क्षमता है
आप हर जगह अपना स्तर बनाये रखते हैं ।

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