Thursday, February 14, 2008

चुलबुली राजकुमारी



एक चुलबुली सी नटखट सी, नन्ही सी प्यारी प्यारी सी
आखों से शरारत छलकाती, सुंदर सी राजकुमारी सी
सुन्दर सी राजकुमारी सी .....

नन्हे नाजुक क्या नर्म हाथ, कलियों कि तो फिर क्या बिसात
क्या होगी यूँ कोई अप्सरा, तुम भी देखो एक बार जरा
छोटे से पैरों पर चलती, पायल की छम छम छम करती
यूँ लगे हवा के झोकों से, हिलती फूलों कि डाली सी
एक चुलबुली सी.......................

चेहरा चन्दा की प्रतिमूरत, देखी न कभी ऐसी सूरत
हर बात में खुशबू चन्दन की, आखें जैसे हिरनी बन की
उंगलियाँ वर्तिका सी कोमल, इठलाती इतराती पल-पल
गालों पर सिन्दूरी लाली, करती हर बात निराली सी
एक चुलबुली सी.......................


संगमरमर बदन सरीखी सी, चहुँ ओर से मूरत नीकी सी
सजदा करने को मन उत्सुक, हर नज़र देखती है रूक रूक
खोलें होंठों की पंखुड़ियाँ, देती बखेर मोती लाड़ियाँ
केशों कि लट या आबनूस, या घटा या नागिन काली सी
एक चुलबुली सी .......................


दांतों पे दामिनी दमक रही, मुख मंडल आभा चमक रही
तुतलाते शब्दों से बोले, मिश्री सी कानों में घोले
एक सुखद सी बारिश होती है, जब बिन आंसू के रोती है
"राघव" मद-मस्त पवन सी वो, मीठी सी मधु मनुहारी सी
एक चुलबुली सी.......................


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10 पाठकों का कहना है :

seema gupta का कहना है कि -

संगमरमर बदन सरीखी सी, चहुँ ओर से मूरत नीकी सी
सजदा करने को मन उत्सुक, हर नज़र देखती है रूक रूक
खोलें होंठों की पंखुड़ियाँ, देती बखेर मोती लाड़ियाँ
केशों कि लट या आबनूस, या घटा या नागिन काली सी
एक चुलबुली सी .......................
" एक राजकुमारी की सुंदर कल्पना और हर शब्द मे उसकी रूप की और उसकी चंचल्त्ता का जो वर्णन किया है अपना ही बचपन याद आ गया . इतनी मनमोहक रचना है के शब्दों मे बयान करना ही मुश्किल है, अती सुंदर "

अवनीश एस तिवारी का कहना है कि -

दांतों पे दामिनी दमक रही, मुख मंडल आभा चमक रही
-- अच्छी रचना है|
बाल्य सुन्दरता का अच्छा बखान है |

अवनीश तिवारी

Anonymous का कहना है कि -

Bahut Achhey Kavivar, Bahut Achhey!!!
A Wish A Very Very Happy B'day Ayushi Dear
God Bless You, Alwayssssss :)

Anonymous का कहना है कि -

Bahut Achhey Kavivar, Bahut Achhey!!!
A Wish A Very Very Happy B'day Ayushi Dear
God Bless You, Alwayssssss :)

-- Amit Verma

रंजू भाटिया का कहना है कि -

दांतों पे दामिनी दमक रही, मुख मंडल आभा चमक रही
तुतलाते शब्दों से बोले, मिश्री सी कानों में घोले
एक सुखद सी बारिश होती है, जब बिन आंसू के रोती है
बहुत ही प्यारी चुलबुली सी कविता लिखी है आपने राघव जी ..!!

Unknown का कहना है कि -

अरे वाह राघव जी! आपने तो सचमुच एक नन्हीं राजकुमारी का शब्द-चित्र उकेर दिया! बहुत ही सुंदर लगी आपकी यह रचना.

Anonymous का कहना है कि -

संगमरमर बदन सरीखी सी, चहुँ ओर से मूरत नीकी सी
सजदा करने को मन उत्सुक, हर नज़र देखती है रूक रूक
खोलें होंठों की पंखुड़ियाँ, देती बखेर मोती लाड़ियाँ
केशों कि लट या आबनूस, या घटा या नागिन काली सी
एक चुलबुली सी .......................


दांतों पे दामिनी दमक रही, मुख मंडल आभा चमक रही
तुतलाते शब्दों से बोले, मिश्री सी कानों में घोले
एक सुखद सी बारिश होती है, जब बिन आंसू के रोती है
"राघव" मद-मस्त पवन सी वो, मीठी सी मधु मनुहारी सी
एक चुलबुली सी.......................
बहुत ही नाजुक सी कविता,मजा आ गया.
आलोक सिंह "साहिल"

Dr. Zakir Ali Rajnish का कहना है कि -

चुलबुली राजकुमारी पर चुलबुली कविता पढने को मिली, बधाई।

anuradha srivastav का कहना है कि -

राघव जी कविता बहुत पसन्द आयी । इसी तरह बाल-उद्यान में नई-नई रचनायें लिखते रहिये।

Alok Shankar का कहना है कि -

राघव जी,
प्यारी रचना

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