Thursday, February 7, 2008

श्री रामायण सार - भाग -2

बच्चो जय श्री राम...
पिछ्ली बार हमने भगवान श्री राम की कथा का प्रथम भाग
(जन्म से वन-गमन ) तक भाग
श्री रामायण सार - भाग -1
http://baaludyan.hindyugm.com/2007/11/1.html यहाँ पढ़ा..
आइये अब उससे आगे की कथा सुनते हैं..

श्री रामायण सार - भाग -1 से आगे..

सूपर्णखां मोहित लक्षमन पर, बोली मुझे वरो सुकुमार
चाल समझ कर शेषरूप ने, नाक कान पर कीया वार
क्षुब्ध राक्षसी ने फिर जाकर, खर-दूषन से करी गुहार
राम लखन के बानों से, खर-दूषन गये स्वर्ग सिधार
त्रेता युग में हरि ने आ जब रघुकुल में लीन्हां अवतार
ऋषियों का संताप मिटाया, दुष्टों का कीन्हां संहार


भेंट हुई सुग्रीव से एक दिन, बाली की करतूत सुनी
राक्षसों के उत्पातों से, बड़े दुखी सब ऋषि मुनी
श्री राम ने धनुष उठा कर, बाली को दिया भवतार
दानव दल हो गए नदारद, भागे करते हाहाकार
त्रेता युग में हरि ने आ जब रघुकुल में लीन्हां अवतार
ऋषियों का संताप मिटाया, दुष्टों का कीन्हां संहार


मामा मारीचि स्वर्ण मृग बन, सीता के सन्मुख आया
सुन्दर कंचन काया भ्रम-मृग, वैदेही के मन भाया
बोलीं प्रभु आखेट करो और, स्वर्ण मृग दे दो उपहार
लक्षमण भी उस ओर दौड़ गये सुन भाई की करुण पुकार
त्रेता युग में हरि ने आ जब, रघुकुल में लीन्हां अवतार
ऋषियों का संताप मिटाया, दुष्टों का कीन्हां संहार


ऋषि रूप रख रावण आया,हो गयी सफल दुष्ट की चाल
बोला, साधू द्वार खड़ा है, साधू को दो भिक्षा डाल
सीता माता ने जैसे ही, लक्षमण रेखा लाँघी पार
बरबस रावण ने सीता को, पुष्पक में कर लिया सवार
त्रेता युग में हरि ने आ जब,रघुकुल में लीन्हां अवतार
ऋषियों का संताप मिटाया, दुष्टों का कीन्हां संहार


गीधराज ने देख जानकी, बिलख रहीं होकर लाचार
पापी रावण पर कर डाले, चोंच से अपनी लाखों वार
लेकिन महाबली रावण ने, पंखों पर मारी तलवार
धराशायी हो गये जटायू, प्रभु की करने लगे पुकार
त्रेता युग में हरि ने आ जब,रघुकुल में लीन्हां अवतार
ऋषियों का संताप मिटाया, दुष्टों का कीन्हां संहार


बच्चों फिर हाजिर होऊँगा बाकी की श्री-राम कथा लेकर...
जय श्री राम..


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6 पाठकों का कहना है :

seema gupta का कहना है कि -

गीधराज ने देख जानकी, बिलख रहीं होकर लाचार
पापी रावण पर कर डाले, चोंच से अपनी लाखों वार
लेकिन महाबली रावण ने, पंखों पर मारी तलवार
धराशायी हो गये जटायू, प्रभु की करने लगे पुकार
त्रेता युग में हरि ने आ जब,रघुकुल में लीन्हां अवतार
ऋषियों का संताप मिटाया, दुष्टों का कीन्हां संहार
"क्या खूब रामायण का वर्णन किया है आपने कवीता के रूप मे, अती सुंदर"
Regards

रंजू का कहना है कि -

अच्छा लगा इसको सुबह सुबह पढ़ना .....थोड़ा सा इसको चित्र और आज की भाषा से सजा कर लिखे .बच्चे बहुत मजे से पढेंगे इसको !!

शोभा का कहना है कि -

राघव जी
बहुत अच्छी कथा सुना रहे हैं और बहुत ही मनोरंजक रूप में । बधाई

Alpana Verma का कहना है कि -

सरल और मजेदार बना कर कथा को कविता का रूप देने में राघव जी को महारत हासिल है.बहुत अच्छा कार्य कर रहे हैं.वैसे शायद बच्चे रामायण न पढ़ें मगर कविता के इस रूप में रामायण की कहानी सुन कर जरुर जिज्ञासु होंगे कि आगे क्या हुआ?

Anonymous का कहना है कि -

बहुत अच्छे

sahil का कहना है कि -

राघव जी अच्छा लगा आपको पढ़ कर.
आलोक सिंह "साहिल"

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