Tuesday, October 6, 2009

बीरबल फिर ,जहाँपनाह फुर्र

बीरबल फिर ,जहाँपनाह फुर्र

एक बार बादशाह अकबर बीमार हो गए .उनकी बीमारी भी विचित्र थी .बहुत उपाय करने पर भी उन्हें नींद नही आती थी .वैद्य और हकीम भी उपचार करते -करते थक गए थे ।
एक दिन चीन से एक हकीम आया .उसने बादशाह की जांच की और एक युक्ति बताई .उसने कहा ,"आप रोज रात को सोते समय एक लम्बी कहानी सुना कीजिये ,इससे आपको नींद आएगी और धीरे -धीरे आपका रोग मिट जाएगा ।"
अकबर ने कहा ,"रोज -रोज मुझे कहानी कौन सुनाएगा ?"
बीरबल ने कहा ,"चिंता की कोई बात नही है .दरबारी तो हैं ही !रोज एक दरबारी आपके पास आएगा और कहानी
सुनाएगा .एक दिन मै भी कहानी सुनाने आऊंगा ।"बादशाह को बीरबल की योजना पसंद आई ।
फिर तो कहानी कहने के लिए प्रतिदिन एक -एक दरबारी आने लगा .लेकिन यह युक्ति सफल नही हुई .दरबारी भी कहानी कहते -कहते थक जाते आर अंत में वे स्वयं ही ऊंघने लगते ।
एक दिन बीरबल की बारी आई .बीरबल ने कहानी कहना शुरू किया -
"एक था जंगल "
"फिर "बादशाह ने कहा ।
"जंगल में एक झोपडी थी .उसमे किसान अपने परिवार के साथ रहता था ।"
"फ़िर ?"
किसान खेती करता ,फसल पैदा करता और खाने के लिए अनाज इकठ्ठा करता ।
"फिर ?"
"पक्षी उसकी झोपडी में घुस जाते और एक- एक दाना लेकर उड़ जाते ।"
"फिर ?"
बीरबल ने सोचा इस फिर -फिर का उपाय करना पड़ेगा ।
बीरबल ने कहा ,"किसान मिटटी का एक बड़ा- सा बर्तन ले आया .उसमे अनाज भरकर एक मोटे कपड़े से बर्तन का मुहँ बंद कर दिया ।"
"फिर "
"पक्षी झोपडी में जाते ,परन्तु उन्हें दाने न मिलते "
"फिर ?"
"उस झोपडी में एक चूहा रहता था .एक चतुर चिडिया ने उससे दोस्ती कर ली .फिर उसने चूहे से अनाज वाले मुहँ पर बंधेहुए कपड़े को कुतरवा दिया ।"
"फिर ?"
"फिर एक के बाद एक पक्षी आते गए .इस प्रकार झोपडी के आगे हजारों पक्षी इकट्ठे हो गए ।उनमे से एक पक्षी झोपडी में गया .उसने कोठार में से दाना लिया फिर उड़ गया ,फुर्र ......"
"फिर ?"
"दूसरा पक्षी आया ,दाना लिया और उड़ गया फुर्र ...... . "
"फिर ?"
"तीसरा पक्षी आया ,दाना लिया और उड़ गया फुर्र ...... "
"फिर ?"
"चौथा पक्षी आया ,दाना लिया और उड़ गया फुर्र ...... "
"फिर ?"
पांचवा ,छठवा ,सातवां, आठवां , नौवां पक्षी आया .दाना लिया और उड़ गया फुर्र ...... "
बीरबल की फुर्र -फुर्र से बादशाह पूरी तरह ऊब गए .उन्होंने कहा ,"अब कितने पक्षी उड़ने बाकी हैं "।
बीरबल ने कहा , "जहाँपनाह अभी तो नौ ही ude हैं .एक -एक करके हजारों पक्षियों को उड़ने में देर तो लगती है न ?"
अकबर ने जम्हाई लेते हुए कहा ,"अब बाकी पक्षियों को तुम कल उडाना .आज तो मुझे नींद आ
रही है "करवट बदलकर बादशाह ऊंघने लगे .बीरबल अपने घर चले गए ।
दूसरे दिन अकबर ने कहा ,"बीरबल !तुम्हारी कहानी में मझे बड़ा मजा आया ,मुझे अच्छी नींद आई ।"
बीरबल ने कहा ,"फिर ?"
बादशाह बोले -"फुर्र ?"
दोनों हस पड़े


संकलन
नीलम मिश्रा


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15 पाठकों का कहना है :

विवेक सिंह का कहना है कि -

मजेदार किस्सा है.

धन्यवाद।

shanno का कहना है कि -

नीलम जी,
कहानी तो बड़ी मजेदार है, इसका धन्यबाद. पर.... इतने दिन आप कहाँ फुर्र हो गयीं थीं? जिस बच्चे को जल्दी नींद ना आती हो उसपर आराम से इस कहानी को आजमाया जा सकता है. वैसे बड़े भी बिना कहानी सुने अपने मन में ही सोचकर चिड़िया उड़ा कर अच्छी नींद से लाभान्वित हो सकते हैं. है ना?

रावेंद्रकुमार रवि का कहना है कि -

सुंदर प्रस्तुति!

manu का कहना है कि -

bahut hi mast kathaa hai..
FIR......????


FURRRRRRRRRRRRR.......!!!!!!!!!

©डा0अनिल चडड़ा(Dr.Anil Chadah) का कहना है कि -

फिर क्या हुआ नीलमजी ?

neelam का कहना है कि -

शन्नो जी ,
हम तो यहीं हैं अगर हम फुर्र हो जाते तो आप को किस्सा कैसे पढने को मिलता ,थोडी पारिवारिक व्यस्तताएं हैं .
अनिल जी ,
आगे वही फुर्र्र ,फुर्र ,फुर्र
हा हा हा हा
आप सभी को किस्सा पसंद आया शुक्रिया

neelam का कहना है कि -

anil ji ,
ek mashwara hai, aap apni photo badl dijiye ,aisa lagta hai ki aap kisi vastu ko apne sir ki taraf le jaa rahe hain ya fir sir khujla rahe hain .anytha mat lijiyega .
baal udyaan par aap ar hum kisi bhi baat par has sakte hain .aap bachchon ke liye bahut achcha likhte hain .chaar ka pahada kab sikha rahe hain ??????????

©डा0अनिल चडड़ा(Dr.Anil Chadah) का कहना है कि -

नीलमजी,

आपके सुझाव का स्वागत है । दर-असल ये फोटो मैंने अपनी बिटिया, दामाद एवं नातियों के साथ अमेरिका प्रवास के दौरान खिचवाई थी । मुझे अपना पोज पसन्द आया इसलिये उसमें अपनी फोटो को ब्लाग पर डाल दिया । मेरी पीठ के पीछे मेरी बिटिया एवं दामाद खड़े हैं । अपनी दूसरी फोटो डाल दूँगा परन्तु शायद वो किसी को पसन्द न आये ।

चार का पहाड़ा मैंने भेज दिया है, आज ही ।

Devendra का कहना है कि -

यहाँ तो बड़ी अच्छी-अच्छी कहानियाँ पढ़ने कम मिलती हैं
लगता है मुझे भी बाल उद्यान के लिए कोई कविता भेजनी पड़ेगी।

neelam का कहना है कि -

aapka swaaagat hai devendra ji .

pooja का कहना है कि -

neelam ji,
fir........

chatpata kissa sun (padh) liye. ab ham bhi furrrrrr

:) :) :)

are aise nahin..... dhanyvaad to kah len :)
haan...... ab furrrrrrrr

Shamikh Faraz का कहना है कि -

बहुत ही मजेदार और चटपटा किस्सा लगा.

तपन शर्मा का कहना है कि -

ha ha ah ah a.... bahut sahi...

fir kya hua??

neelam का कहना है कि -

fir wahi ,
furr,furr furr ,

bharat का कहना है कि -

apke dwara prastut sabhi kahaniya bahut hi acchi hain v shikashaprad hain..

Apka prayas sarahniya hain.

Bharat Sharma
Muzaffarnagar, Uttar Pradesh

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