Monday, October 26, 2009

मेरा नाम चुकंदर बाबू



मुझे देख कर ना डर जाना
दिखने में नहीं इतना सुन्दर
पर मेरा नाम नहीं अनजाना
सब कहते हैं मुझे चुकंदर।

कुछ तो देख इतना डर जाते
कहने लगते ' बाप-रे-बाप '
लगता तब कुछ ऐसा मुझको
उनको सूंघ गया हो सांप।

शलजम, गाजर, मूली, आलू
यह सब लगते मेरे रिश्तेदार
एक सी मिटटी के अन्दर रह
हम सबकी होती है पैदावार।

अगर कभी कोई मुझे खरीदे
घर में सब बच्चे देखें घूर-घूर
जैसे ही मेरा रस आता बाहर
खड़े हो जाते वह मुझसे दूर।

लाल-बैंगनी सा रंग बदन का
नहीं टपकता है मुझसे नूर
पर कभी न कोई मुझपर हँसना
गुणों से हूँ मैं बहुत भरपूर.।

कैल्शियम, आयरन, फाइबर
और भरे हैं विटामिन-मिनेरल
अब नहीं मुझे देख घबराना
कार्बोहाइड्रेट भी है मेरे अन्दर।

अगली बार मार्केट जाओ तो
मम्मी के संग तुम भी जाना
मुझे ढूंढ-खरीद कर घर लाओ
फिर मम्मी से कुछ बनवाना।

घबराने की कोई बात नहीं है
छूकर देखो, मुझे हाथ लगाओ
मुझे उबालो, छीलो-काटो और
तरह-तरह से फिर आजमाओ।

कई प्रकार के तरीकों से तुम
खाने को कुछ रंगत दे डालो
अगली बार को सलाद बनाओ
गाजर-मूली संग घिस डालो।

मोटी खाल को छीलो पहले
लम्बी-पतली फांकें फिर काट
उबला आलू और दही मिलाकर
चाट-मसाला संग बनती चाट।

बैंगन, गोभी, प्याज़ के टुकड़े
धनिया, मिर्च नमक और बेसन
पानी संग मिला कर मुझको
तलना गरम पकौड़े छन-छन।

मिक्सी में बने जूस चीनी संग
फिर जब भी जाओ तुम स्कूल
थर्मस में भर इसको ले जाना
साथ में पीने को कुछ कूल-कूल।

गाजर, प्याज़, मशरूम डालकर
चावल संग सकते हो मुझे पका
सबके संग मिल जुल कर खाओ
तो खाने में बढ़ जाये जायका।

हर मौसम में यदि खाना हो तो
बोतल के सिरके में मुझको रखो
जब अचानक मूड बने खाने का
जल्दी निकाल कर मुझको चखो।

अब ना मुझे ऐसे घूर-घूर कर देखो
अपने मन पर सब रखना काबू
मेरी बातों पर सदैव ध्यान देना
मैं हूँ अब सबका दोस्त चुकंदर बाबू।


--शन्नो अग्रवाल


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6 पाठकों का कहना है :

neelam का कहना है कि -

कुछ तो देख इतना डर जाते
कहने लगते ' बाप-रे-बाप '
लगता तब कुछ ऐसा मुझको
उनको सूंघ गया हो सांप।
शन्नो जी ये वाली लाइनें देख कर ही लोग कमेंट्स लिखने
के पहले भाग जाते हैं ,पर हम ने तो ठान लिया कि चुकंदर से इतनी प्यारी चीज खाने की बनायी जाए कि लोग वाह -वाह कर उठे ,रेसिपी आपको मेल से भेज देंगे |कुल मिलाकर टमाटर की ही तर्ज पर बनी एक और कविता अच्छी कविता ,बाकी सब्जियों जैसे बैगन रजा और कद्दू राजा पर भी लिखिए फिर इन्हें रिकॉर्ड करते या करवाते हैं ,कैसा विचार है शन्नो जी ???????

shanno का कहना है कि -

नेकी और पूछ-पूछ. आपने अब मेरी कवितायों की तरफ भी अपना रुख किया है मेरा मतलब है की अपनी दया-दृष्टी फेंकी है इसका धन्यबाद. पढ़कर लगा की जैसे आपने मेरे मन की बात कह दी हो. आपकी अमरस जैसी मधुर बाणी में मेरी रचनायें घुल कर तो और मीठी हो जायेंगीं. अधिक क्या कहूं? कम कहे को ही अधिक समझना. मेरी तरफ से तो हरी झंडी हिल गयी है. चुकंदर बाबू का पूरा हाल पढ़ने और सुनने के बाद सब अपनी राय बदल देंगें. उन पर तवज्जो नहीं दी जा रही है इसलिए जरा गुस्से में दिख रहे हैं. वैसे तो बड़े गुनी हैं '. हम काले हैं तो क्या हुआ दिलवाले हैं'...सुना होगा गाना आपने भी, है ना?
और आपके दिमाग ने जो एक नयी रेसिपी ईजाद करी है तो अब मुझे उसका बेसब्री से इंतज़ार है.
आगे अब एक नया हुक्म जो आपने दिया है उसे भी ' ओ, मलिका-ऐ-बाल-उद्यान हम अपने सर- आँखों पर लेते हैं और अपनी तरफ से आपके हुक्म की तामील करने की पूरी कोशिश करेंगें'. वर्ना कहीं ऐसा ना हो की हमारा सर कलम कर दिया जाये.

pooja का कहना है कि -

अरे वाह शन्नो जी,
आपने तो चुकंदर के गुणों का ऐसा बखान किया है कि अब तो इसे खाना ही पड़ेगा , और आपने यह बड़ा अच्छा किया कि इसे पकाने और खाने के तरीके भी बता दिए. अगर ऐसे ही धन्यवाद कह दिया तो इतनी अच्छी कविता पढने का कोई फायदा नहीं, इसलिए धन्यवाद के तौर पर हम चले चुकंदर खरीदने और आप आमंत्रित हैं, आज चुकंदर की चाट खाने के लिए :) , आइयेगा जरूर.
बाल उद्यान के सभी साथियों के लिए भी यह निमंत्रण है कि , आप सब भी शन्नो जी के साथ जरूर पधारें :)

ACHARYA RAMESH SACHDEVA का कहना है कि -

SHANNOJI NE SABJI BANAI
UNME ACHCHI SHABDI LAGAI
SAWAD LAGI H HUMKO BHAI.
THODI DER HUI H KHAI.
SARDI MEIN YEH BHA JATI H
JODO KA DARD BHAGATI H.
SAHLGAM SHALJAM H YEH BHAI
SHANNOI JI AAPKO BADHAI.

ACHARYA RAMESH SACHDEVA का कहना है कि -

IF POSSIBE THEN SEND YOUR EMAIL ID FOR FURTHER CORRESPONDENCE. FOR SOME PERMISSION

shanno का कहना है कि -

धन्यबाद है आप सभी को
जिसने भी है इसको खाया
पढ़के सभी तरीके इसके फिर
तरह-तरह से है आजमाया.
हो सलाद में या बने पुलाव
बने रायता, सब्जी या पकौड़े
अब सारे बच्चे खायेंगे इसको
सुन कर आयेंगे सब दौड़े-दौड़े.
चलो चलते हैं पूजा जी के घर
आज चुकंदर की बनी है चाट
बड़े प्रेम से हमें दिया निमंत्रण
अब हम सब खायेंगें मिल-बाँट.
और रमेश जी, मैं हुई विभोर
जो तारीफों के बांधे इतने पुल
कितना अच्छा होता यदि खाते
आपकी चीज़ों को भी मिलजुल.
तो अब लीजे यहाँ I. D. भी मेरी
पूछा आपने तो हुई ख़ुशी अपार
हमको भी दें कुछ सलाह-मशवरा
और कविता पर भी अन्य बिचार.

shannoaggarwal1@hotmail.com

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