Friday, October 30, 2009

तितली



रंग बिरंगी तितली
उड़ती फिरती तितली
इस फूल से उस फूल
संग हवा के झूमती.

कितना निर्मल जीवन
कितना पावन जीवन
खुशियों की ले सौगात
महका बहका जीवन.

जीवन हर्षित करती
स्वर्ग बने यह धरती
बाग में जैसे तितली
उन्मुक्त हवा में उड़ती.

विकार रहें सब दूर
चित्त निर्मल भरपूर
दुख गम से अनजान
चेहरे पर छाये नूर.

कुलवंत सिंह


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4 पाठकों का कहना है :

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ का कहना है कि -

बहुत सुंदर तितली का सृजन किया है आपने। बधाई।
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

shanno का कहना है कि -

आपकी कविता भी खूब सुंदर है. इसने मुझे बचपन में फूलों की क्यारी पर उड़ती हुई तमाम तरह की तितलियों की याद दिला दी. और जिन्हें हमेशा हाथों से पकड़ कर छूने की कोशिश रहती थी.

रंजना का कहना है कि -

Bahut hi sundar rachna...

Shamikh Faraz का कहना है कि -

विकार रहें सब दूर
चित्त निर्मल भरपूर
दुख गम से अनजान
चेहरे पर छाये नूर.

aasaan shabdon me sundar rachna kulwant ji.

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