Friday, March 7, 2008

हम हैं बच्चे

हम हैं बच्चे दिल के सच्चे
समझ न हमको कच्चे कच्चे
जब अपनी पर हम आ जाते
बड़े बड़ों के छूटते छक्के ।

सात समंदर पार हो जाना
दूर गगन से तारे लाना
सब कुछ अपने बस में भैया
मेहनत से क्यूँ जी चुराना ।

दोस्त है अपनी लाल परी
हाथ में उसके छड़ी सुनहरी
जब भी मांगो, जो भी मांगो
सबकी इच्छा करती पूरी ।

सूरज अपने दादा लगते
दुनिया को रोशन कर देते
संग हमारे खेल खेल कर
जब वह छिपते हम घर आते ।

चंदा अपने मामा लगते
आँख मिचौली खूब खेलते
घटना, बढ़ना, गायब होना
गजब खेल हमको दंग करते ।

हम हैं बच्चे, दिल के सच्चे
सारी दुनिया से हम अच्छे
जब अपनी करतूत दिखाएं
बड़े बड़े खा जाते गच्चे ।

कवि कुलवंत सिंह


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12 पाठकों का कहना है :

seema gupta का कहना है कि -

चंदा अपने मामा लगते
आँख मिचौली खूब खेलते
घटना, बढ़ना, गायब होना
गजब खेल हमको दंग करते ।

हम हैं बच्चे, दिल के सच्चे
सारी दुनिया से हम अच्छे
जब अपनी करतूत दिखाएं
बड़े बड़े खा जाते गच्चे ।
" बहुत प्यारी और कोमल सी कवीता , अपने बचपन को याद दिलाती और मन को गुदगुदाती सी"
Regards

परमजीत बाली का कहना है कि -

कुलवंत जी,बहुत बढिया बाल कविता है ।बधाई।

रंजू का कहना है कि -

अच्छी लगी आपकी यह बाल कविता कवि जी !!

tanha kavi का कहना है कि -

बहुत खूब कवि जी!
अंतिम पंक्तियों तक आते-आते तो मैं बचपन की कई यादों को गिन चुका था।
बधाई स्वीकारें।

-विश्व दीपक ’तन्हा’

Bhupendra Raghav का कहना है कि -

बढिया बाल मनसूबे कविता के माध्यम से .

seema sachdeva का कहना है कि -

aapki pyaari si komal si baal kavita bahut pasand aai(badhaai ho)....seema sachdev

sahil का कहना है कि -

कुलवंत जी बहुत ही प्यारी बाल कविता,
आलोक सिंह "साहिल"

Kavi Kulwant का कहना है कि -

धन्यवाद आप सभी का... लेकिन अभी कितने बच्चे लगभग देखते होंगे इस साइट को?

आलोक शंकर का कहना है कि -

bachcho ke liye achchi kavita hai
unaki jaban par aane layak hai
aur unke shabdo me hi unke liye sandesh bhi

Bhupendra Raghav का कहना है कि -

बढ़िया कवि जी बहुत बढिया..

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ का कहना है कि -

वाह कुलवंत जी, बहुत सुन्दर कविता है। मेरी बधाई स्वीकारें।

anju का कहना है कि -

कुलवंत जी अच्छी बालकविता लिखी है आपने
हम हैं बच्चे, दिल के सच्चे
सारी दुनिया से हम अच्छे
जब अपनी करतूत दिखाएं
बड़े बड़े खा जाते गच्चे ।
वाह

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