Monday, March 17, 2008

परियों की शहजादी

मैं शहज़ादी परियों की हूँ
आसमान में मेरा घर
राहों में मेरी बिछे सितारे
मेरा पता है चाँद नगर
मैं कलियों सी सुन्दर कोमल
चाहूँ जहाँ पे जाती हूँ
हवा के संग में बातें करती
नीलगगन में उड़ती हूँ
हरी भरी धरती को देखूँ
आसमान में बादल को
देखूँ नदियाँ झरने पर्वत
और पेड़ों की हलचल को
कुदरत का संगीत मैं सुनती
देखूँ इसकी सुन्दरता
फूलों से खुशबू लेती हूँ
और भँवरों से चंचलता
नन्हे बच्चे मुझको भाते
और भाता है भोलापन
न दुनियादारी न झँझट
कितना प्यारा यह बचपन
मन में मैल नहीं बच्चों के
न ही कुछ खोने का डर
राहों में मेरी बिछे सितारे
मेरा पता है चाँद नगर

-सीमा सचदेव, बंगलूरु


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6 पाठकों का कहना है :

रंजू का कहना है कि -

परियों की शहजादी से इस कविता के द्वारा मिलना बहुत अच्छा लगा :)

©डा0अनिल चडड़ा(Dr.Anil Chadah) का कहना है कि -

अति सुन्दर रचना

anju का कहना है कि -

अति सुंदर सीमा जी
मन में मैल नहीं बच्चों के
न ही कुछ खोने का डर
राहों में मेरी बिछे सितारे
मेरा पता है चाँद नगर
अच्छा बाल गीत है
बच्चे ऐसा पसंद करते हैं

Bhupendra Raghav का कहना है कि -

- बहुत सुन्दर कविता है बाल-मन की परख है आपको.. आपकी कविता पढ़ अपुन का बाल-मन जाग गया - ही ही ही..

कौन है परियों की शहजादी
मुझको करनी है बस शादी
पढ़ाई वढ़ाई से मैं थक गया हूँ
रोज के स्कूल से पक गया हूँ
मेरा सेहरा तय कर आओ
जल्दी से बारात सजाओ
मुझे देर बिलकुल नहीं करनी
मैं बरना वो होगी बरनी

seema sachdeva का कहना है कि -

Ranju ji ,Dr.Anil ji aur Anju ji aapko baal geet pasand aaya aur saarthak tippani ke liye dhanyavaad . Bhupendra ji aapko yah geet itana pasand aaya ki shaadi karane ka man banaa liya ,achcha vichaar hai aapka ,chalo is shaadi me ham sab baaraati honge ,ham milvaate hai aapko aisi hi raajkumaari se ,thoda sa intzaar keejiye , ham agali kahaani aapki barani mera matalab ek raajkumaari ki bhej rahe hai , aanaa jaroor, he,he ,he.....seema sachdev

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ का कहना है कि -

कविता में ही सही, पर परियों की शहजादी से मिल कर अच्छा लगा।

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