Thursday, March 27, 2008

बदला मेरा हिस्साब

खत्म हो गई आखिरी परीक्षा
आने वाली थी सातवीं कक्षा
नतीज़ा पता करने का दिन आया
अध्यापक ने माँ को बुलाया
जैसे ही माँ स्कूल में आई
अध्यापक ने एक अच्छी ख़बर बताई
वो बोली आपका बेटा हुआ हैं पास
सुनिए एक और ख़बर जो हैं बहुत खास
इस बालक ने पार कर लिया हैं
छठीं कक्षा का माध्यम
और अच्छे अंक से यह आया हैं
हर क्षेत्र में प्रथम
जैसे ही अध्यापक ने यह बतलाया
वैसे ही खुशी के मारे मैं चिल्लाया
घर आते ही मैंने फ़ोन उठाया
बुआ, नानी, मासी का नम्बर लगाया
शाम ही , सब तोहफे ले कर
घर पर आये
पर हाय रे, सब तोहफे मैंने
एक से हैं पाए
मैं सोच रहा था, मिलेंगे खिल्लोँ
सब में थीं बस किताब ही किताब
और पढ़-पढ़ के बदला मेरा हिस्साब

बाल कवि- राघव शर्मा


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6 पाठकों का कहना है :

शोभा का कहना है कि -

वाह राघव बेटा!
बुरे फँसे ना। किताबों से परहेज़ मत करो । हाँ कुछ दिन खेलो-कूदो फिर उनको पढ़ो। सस्नेह

seema sachdeva का कहना है कि -

haaji Raajhav ,
pratham aane par bahut-bahut badhaai , aur haa kitaabe bhi padhana aur khoob masti bhi karna ,par aisi pyaari -payaari kavitaayen likhana nahi bhoolana , ham aapki aur kavitaayen bhi padhana chaahege.Shubhasheesh.....seema sachdev

anju का कहना है कि -

बहुत बढिया
badhayi pratham aane ki

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ का कहना है कि -

सही हिसाब, सही किताब
मंजिल तक ले जाए जनाब

शैलेश भारतवासी का कहना है कि -

राघव,

तुमने इस बार निराश किया। कुछ खास नहीं लिखा तुमने। बिलकुल मज़ा नहीं आया

sahil का कहना है कि -

राघव जी,बढ़िया है,लगे रहिए
आलोक सिंह "साहील"

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