Friday, March 14, 2008

तितली परी

परी मै नन्ही उड़ती हूँ
बादल संग मै तिरती हूँ
पल में यहाँ पल में वहाँ
हवा से बाते करती हूँ ।

दूर सितारों में घर मेरा
परियों का वह देश है मेरा
चांद तारों से पिरो कर
बनता है परिधान मेरा ।

'तितली' परी है मेरा नाम
'रानी' परी ने सौंपा काम
जग में जा कर खूशी बिखेरूँ
हर बच्चे को दूँ मुस्कान ।

बच्चे मुझको भाते हैं
मुझसे हिलमिल जाते हैं
मिल बैठ कर हम सब फिर
हंसते खिलखिलाते हैं ।

जिसको गम है कोई सताता
वह फिर मेरे पास आता
मिठाई, खिलौने भर कर देती
हंसता हंसता वापस जाता ।

दूर गगन में ले कर जाती
आसमाँ की सैर कराती
किसी भी बच्चे की आँखों में
आँसू को मै देख न पाती ।

बच्चों आओ मेरे पास
जादुई छड़ी है मेरी खास
सबकी इच्छा पूरी करती
ख्वाहिश कहो अपनी बिंदास ।

कवि कुलवंत सिंह


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7 पाठकों का कहना है :

seema sachdeva का कहना है कि -

kavi kulvant ji , bahut achchi lagi aapki yah kavita , kuch aisa hi bhaav vyakat karati kavita maine bhi likhi aur baal-udyaan me bheji bhi hai ,shaayad kuch dino me publish hogi.....seema

seema sachdeva का कहना है कि -

bahut achchi lagi aapki kavita....seema

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ का कहना है कि -

इस प्यारी सी कविता के लिए बधाई। ये पंक्तियाँ तो बहुत ही प्यारी हैं-
"'तितली' परी है मेरा नाम
'रानी' परी ने सौंपा काम
जग में जा कर खूशी बिखेरूँ
हर बच्चे को दूँ मुस्कान।"

sahil का कहना है कि -

बहुत ही प्यारी कविता,बधाई हो सर जी
आलोक सिंह "साहिल"

anju का कहना है कि -

दूर गगन में ले कर जाती
आसमाँ की सैर कराती
किसी भी बच्चे की आँखों में
आँसू को मै देख न पाती ।

अति सुंदर कुलवंत जी

रंजू का कहना है कि -

एक और आपके द्वारा रचित सुंदर बाल कविता अच्छी लगी !!

Bhupendra Raghav का कहना है कि -

आजकल बाल-उद्यान में नित-नित नई नई परियो का पदार्पण देख मन खुश हैं, बहुत परियाँ तितलिया, मछली रानिया आ रहीं है..

स्वागतम.........

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