Saturday, May 24, 2008

कुछ नन्ही-नन्ही कविताएँ (आओ गाएँ)


एक-दो
बम-बम बो
तीन-चार
खोलो द्वार
पाँच-छ:
भारत की जय
सात-आठ
सीखो पाठ
नौ-दस
हो गई बस।

२.
चन्दा मामा आए हैं
तारों को सँग लाए हैं
टिम-टिमाते सुन्दर तारे
लगते मुझको प्यारे-प्यारे

३.
नभ मे छाए बादल काले
उमड़-घुमड़ नाचे मतवाले
खिल-खिल, खिल-खिल
हँस दी कलियाँ
भर-भर गई
बच्चों से गलियाँ

४.
ची-ची ची-ची चिड़ियाँ बोली
आओ बच्चो खेलें होली
रंग-बिरंगे हम रंग डाले
बन जाएँ हम सब हमजोली

५.
काव-काव काव-काव कौआ करता
बच्चों से यह कभी न डरता
झूम-झूम के नाचे मोर
जब छाएँ बादल घनघोर

६.
मीठा-मीठा आम रसीला
दिखने में है पीला-पीला
इसका रस हम सबको भाए
खाएँ खूब जब पापा लाएँ

७.
सुबह-सवेरे सूरज उगता
नन्हा-मुन्ना नींद से जगता
हो तैयार स्कूल को जाए
मम्मी-पापा खुश हो जाएँ

८.
बन्दर मामा केला खाता
बच्चों तो खूब चिढ़ाता
डम-डम डमरू बजा के मदारी
बन्दर मामा को खूब नचाता

-सीमा सचदेव


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7 पाठकों का कहना है :

pooja anil का कहना है कि -

सीमा जी ,

आपने तो आज बच्चों के लिए पूरे दिन कविताएँ गाने का बंदोबस्त कर दिया ,एक-दो-तीन, चन्दा मामा,तारे, चिडिया ,बन्दर मामा, मोर, कौआ, नन्हा मुन्ना,बादल आदि सब आए हैं , अब तो हमें भी इनके सुर में सुर मिलाके गाना गाना होगा .
बहुत सुंदर छोटी छोटी कविताएँ लिखी हैं , बधाई

^^पूजा अनिल

Bhupendra Raghav का कहना है कि -

क्या बात है...

नन्हें मुन्नों के लिये नन्हीं मुन्नी रचनाये..

बहुत बढिया...

शोभा का कहना है कि -

सीमा जी
सुन्दर गीत लिखा है। बधाई स्वीकारें।

Kavi Kulwant का कहना है कि -

bahut achcha seema ji

रंजू ranju का कहना है कि -

वाह नन्ही नन्ही बच्चो की कविता सच में पढने में बहुत अच्छा लगा ..बधाई

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ का कहना है कि -

बहुत ही प्यारे शिशुगीत हैं। सीमा जी, इतने सुन्दर शिशुगीतों के लिए बधाई स्वीकारें।

Sushma Garg का कहना है कि -

सीमा जी,
छोटे बच्चों से इन्हे गवाने में बड़ा ही मजा आयेगा.
बहुत सुंदर और विविध.
बधाई.

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