Tuesday, May 13, 2008

गाय



गाय बड़ी उपकारी है
सब जीवों से न्यारी है
इसकी तुलना नहीं किसी से
सब पर ममता वारी है


ये देवों की भी माता है
हम सबकी जीवन दाता है
रोगों को ये दूर भगाये
बच्चों को बलवान बनाये
हम सब इसके आभारी हैं


तन भी अर्पण दूध भी अर्पण
लाल भी अर्पण श्रम भी अर्पण
रोम रोम सृष्टि को अर्पण
इसकी पूजा सबसे बढ़कर
कहती दुनिया सारी है


खाती सूखा घास पात ये
दूध दही के भंडार भरे
माँ समान स्नेह लुटाये
सब जग का कल्याण करे
गिनती उपकारों की भारी है
गाय बड़ी उपकारी है


सुषमा गर्ग
13.5.2008


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5 पाठकों का कहना है :

mahashakti का कहना है कि -

बेहद खूबसूरत रचना बधाई

Bhupendra Raghav का कहना है कि -

बेहतरीन रचना सुषमा जी, बहुत अच्छी और गाय माता का बखान करती आपकी रचना एक दम गाय के समान ही न्यारी लगी..

रंजू ranju का कहना है कि -

खूबसूरत रचना है यह सुषमा जी

sunita yadav का कहना है कि -

गाय के बारे में आप ने बहुत ही सुंदर कविता लिख डाली सुषमा जी ...वाह
सुनीता यादव

pooja anil का कहना है कि -

सुषमा जी ,

आजकल गाय के बारे में महानगरों के बच्चों को ज्यादा पता नहीं होता है , पहले तो गावों और शहरों में भी गाय देखने को मिल जाती थी किंतु आजकल सब जगह पर गाय के दर्शन नहीं होते, ऐसे में आपकी कविता बहुत जानकारी भरी है, बच्चों को सहज जानकारी देने का धन्यवाद

^^पूजा अनिल

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