Thursday, May 1, 2008

बाल उद्यान के प्राणी उद्यान की सैर

पेड़ों पर चढ़ जाता बन्दर
तोड़ तोड़ फल खाता बन्दर
देखो अगर चिढ़ाते इसको
वापस हमें चिढ़ाता बन्दर



हरे पंख पर चोंच है लाल
मिट्ठू मियाँ करें कमाल
अमरूद मिर्ची खाता है
फुर-फुर्-फुर उड़ जाता है



बादल छाये जब घन-घोर
चन्दे फैला, नाँचा मोर
और मोरनी उसे देखती
घूम रही थी चारों ओर




कट्टो गिलहरी प्यारी प्यारी
पीठ पर जिसके लम्बी धारी
सुबह सुबह घर आती है
बिस्किट खाकर जाती है



मैं मैं करती आती बकरी
झुंड में चरने जाती बकरी
कड़वे पत्ते खाती बकरी
मीठा दूध पिलाती बकरी


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7 पाठकों का कहना है :

Seema Sachdev का कहना है कि -

BANDAR MAAMAA KELA KHAAYE
MITHU MIYAAN BER
GILAHARI FAT SE VRIKSH CHADH JAAYE
LAAYE JARAA NA DER
COO COO KARKE MOR JO NAACHE
NAACHE MAN KAA MAYUR
ME ME KARKE BAKRI BOLE
BHAAGE SAARE DOOR

bahut achche raaghav ji ,praani udyaan kee sair karke majaa aa gayaa......apna bhi man karta hai na
PAKSHI HOTA MAI NEELGAGAN KA
MEETHA FAL KHAATA MAI CHAMAN KA
IDHAR UDHAR UD UD KAR JAATA
JAHAA PE CHAAHTA VAHEE PE RAHTA

BADHAAII......SEEMA SACHDEV

रंजू ranju का कहना है कि -

बहुत सुंदर लगी यह बाल रचना राघव जी ..प्राणी उद्यान की सैर हो गई यह तो मुफ्त में :)

Sushma Garg का कहना है कि -

राघव जी,
प्राणी उद्यान की सैर करके मजा आ गया. बेहतरीन कविता.
बधाई.

Kavi Kulwant का कहना है कि -

बहुत अच्छे..

शैलेश भारतवासी का कहना है कि -

कोई जवाब नहीं राघव जी, बहुत बढ़िया।

शोभा का कहना है कि -

राघव जी
आपका जवाब नहीं। हास्य कविता और बालकविता दोनो में लाजवाब।

pooja anil का कहना है कि -

भूपेंद्र जी ,

आपने तो सारे प्राणियों से बाल उद्यान में ही मुलाकात करा दी , बहुत सुंदर.

^^पूजा अनिल

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