Tuesday, May 27, 2008

गुब्बारे

ले लो ले लो जी गुब्बारे
रंग बिरंगे प्यारे प्यारे

लाल गुलाबी नीले नीले
हरे जामनी पीले पीले

आओ चिंटू सुनो री गुड़िया
लो गुब्बारे बढ़िया बढ़िया
एक रूपये में एक मिलेगा
जो मन भाए वो तुम लेना

दूर दूर तक उड़ते जाते
छुट जाए तो हाथ ना आते
देखो कस के पकड़े रखना
छूट गए तो फिर ना कहना

शहर शहर में जाता हूँ
सबका मन बहलाता हूँ
फिर आऊँगा शहर तुम्हारे
लेकर और नए गुब्बारे
रंग बिरंगे प्यारे प्यारे

सुषमा गर्ग

27.05.2008


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6 पाठकों का कहना है :

Seema Kumar का कहना है कि -

वाह ! बहुत ही प्यारे गुब्बारे !

Pooja Anil का कहना है कि -

सुषमा जी ,
एक पीला वाला गुब्बारा मुझे भी दे दें, वैसे तो सभी गुब्बारे बहुत प्यारे लग रहें हैं ,पर अगर सब हम ले लेंगे तो औरों के लिए कुछ भी नहीं बचेगा....इस लिए सिर्फ़ एक ही चलेगा .

जितनी प्यारी कविता है उतने ही सुंदर चित्र भी हैं . बधाई

^^पूजा अनिल

kavi kulwant का कहना है कि -

सुषमा जी की सुषमा फैलाती कविता..अति सुंदर

Dr. Zakir Ali Rajnish का कहना है कि -

गुब्बारे बच्चों को बहुत ही भाते हैं, आशा है कि गुब्बारों की तरह यह कविता भी उनको भाएगी।

सीमा सचदेव का कहना है कि -

sushama ji itane pyaare-pyaare gubaare ,pooja ji ko ek par do gubaare chaahiye ,vo laal aur neela,le loo :))bahut hi pyaari si kavita ke liye pyaari si badhaaii....seema sachdev

भूपेन्द्र राघव । Bhupendra Raghav का कहना है कि -

हटो हटो सारे के सारे
मेरे है ये सब गुब्बारे
कल मुझको क्यूँ नही खिलाया
अब जब मैं गुबारे लाया
कैसे टूट पडे बेचारे
हटो हटो सारे के सारे
मेरे है ये सब गुब्बारे
सुषमा जी से कहकर खास
मँगवाये सब अपने पास
चलो आइसक्रीम लेकर आओ
और एक एक गुब्बारा ले जाओ
हैप्पी............

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