Tuesday, May 20, 2008

उदास धरती


बड़े जोर की गर्मी थी
तपती जगती लगती थी
ताल तलैया सब थे सूखे
ज्वार खड़ी ज्यों सबसे रूठे
अम्बर तक धूल का उठे गुबार
ज्यूँ समुद्र में आ गया ज्वार

बच्चे मचले जाते थे
प्यास प्यास चिल्लाते थे
मेघा मेघा पानी दे
गली गली शोर मचाते थे

बच्चों की ये करूण पुकार
पहुँची वरूण देव के द्वार
नभ में काली बदली छाई
अम्बर से कुछ बूँदें आईं
लगे संदेशा शीतल लाई
झूम झूम फिर वर्षा आई

यूँ धरती का कण कण सरसा
माटी में सोना सा बरसा
खेतों में पानी भर आया
हरिया देख देख मुस्काया

ताल तलैया नाले नदिया
जल से भर गयी आम की बगिया
कोयल पँचम सुर में गाती
दूर हुई धरती की उदासी

सुषमा गर्ग
20.5.08




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7 पाठकों का कहना है :

Randy Furco का कहना है कि -

Hello

राजीव रंजन प्रसाद का कहना है कि -

आपकी रचना "मेघ मल्हार" बन गयी है..दिल्ली की बरसात का यही कारण तो नहीं :)

***राजीव रंजन प्रसाद

Bhupendra Raghav का कहना है कि -

बहुत बढिया बाल-रचना

सफल हुई बारिश लाने में..

Kavi Kulwant का कहना है कि -

बहुत अच्छा.. वाह वाह..

Seema Sachdev का कहना है कि -

sushama ji aapki kavita bahut achchi hai , fir bhi bina maange ek sujhaav dena chaahati hoo ,jab ham bachcho ke liye likhate hai to yahi pryaas hona chaahiye ki ham saakaaratamak sandesh de aur aapki rachana is par poori bhi utari lekin sheershak aapne "UDAAS DHARATI" diya ,agar isi rachana ka sheershak "KHUSHAHAAL DHARATI" jaisa kuch hota to sheershak dekhkar hi man ullaas se bhar jaata....seema sachdev

शोभा का कहना है कि -

सुषमा जी
सुन्दर कल्पना है-
बच्चों की ये करूण पुकार
पहुँची वरूण देव के द्वार
नभ में काली बदली छाई
अम्बर से कुछ बूँदें आईं
लगे संदेशा शीतल लाई
झूम झूम फिर वर्षा आई
बधाई ।

pooja anil का कहना है कि -

सुषमा जी ,

लगता है आपकी कविता ने धरती की उदासी सचमुच दूर कर दी है !!! बहुत सुंदर बाल रचना है , बच्चे इसे सुर में गा भी सकते हैं . बधाई
साथ में दिए गए चित्र कविता को सार्थक कर रहें हैं .

^^पूजा अनिल

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