Thursday, January 22, 2009

आप कितने बुद्धिमान हैं ?( मनु जी ने दिया ग़लत उत्तर )

लोटा ले लोटा मगर, मूली मिली न एक.
माचिस लाई छिपकली, चन्द्र-कलाएँ देख.
आचार्य संजीव वर्मा

संजीव जी और तपन जी दोनों के उत्तर सही हैं ,आचार्य जी ने जो उत्तर दोहे में पिरोया है उसे सर्वश्रेष्ठ उत्तर घोषित किया जाता है
इससे सिद्ध होता है कि किसी टोपी वाले के कहने में नही आना चाहिए ,ख़ुद भी देखा ,भाला ,सोचा समझा कीजिये ,कब किसको टोपी पहना दे पता नही (मनु जी कृपया अन्यथा न ले ,उत्तर रोचक बनाने के लिए लिख दिया है )


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5 पाठकों का कहना है :

आलोक सिंह "साहिल" का कहना है कि -

hahahahahaa........
to sajiv ji aur tapan bhai,aakhirkaar aap panchavi pas ho hi gaye,rah gaye bechare manu ji.koi nahin next chance..
ALOK SINGH "SAHIL"

manu का कहना है कि -

आचार्य को प्रणाम ,
तपन जी को बधाई ,
आचार्य को बधाई इसलिए नहीं के वो सर्व ज्ञाता हैं...उन्हें नहीं मालूम होगा तो किसे मालूम होगा...?
और आप आजकल कुछ ज्यादा ही " रोचक" नहीं बना रहीं ......?
आपने रचना जी और तपन जी के साथ मिलकर एक तो मेरी शायरी वाली फैक्ट्री बंद करवा दी,और जब से मैंने इमानदारी के साथ आपको बताया है के मैं लखनऊ का नहीं दिल्ली का हूँ..........तब से तो आप बस.....
खैर बड़ा ही अच्छा लगा हार कर.....जीतने से भी अच्छा....जैसे पहले वाली भोजपुरी कविता पर एक खुशनुमा मॉहौल बन गया था....वो ही हंसी खुशी तो इस तनाव भरे जीवन से कुछ राहत दिलाती है..कभी कभी ऐसी किसी रचना पर टिपण्णी कर तो देते हैं ...पर वो बात नहीं होती के सब लोग एक परिवार की तरह से खुल कर ठहाके लगा सकें........

neelam का कहना है कि -

मनु जी ,
आप की शायरी की फैक्ट्री किस ने बंद करवा दी ?कुछ समझ में आया नही
आप लखनऊ के हो या चेन्नई के हम सब सबसे पहले भारतवासी हैं ,शैलेश जी को छोड़कर ,हा हा हा |

शोभा जी ,सीमा जी,रचना जी तथा सभी प्रतिभागियों को धन्यवाद के साथ सूचित किया जाता है ,कि टोपी वाले कार्टून से ,माफ़ कीजियेगा कार्टूनिस्ट से जरा बच के रहिएगा देखिये ,सब को घुमा दिया है

आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' का कहना है कि -

रथ विहीन हैं सारथी,
शैल रहित शैलेश.
शोभा की शोभा अमित,
नीलम हैं रत्नेश.
सूझहीन की सहेली,
बनी पहेली आज.
बूझा सबने, पर मिला,
नासमझी को ताज.
तपन सपन देखे- करे
मनु उनको साकार.
हा..हा..बिन साहिल मचे
जग में हाहाकार.
रचना रच ना फ़िर कोई,
सीमा हो निस्सीम.
हा..हां. ही..ही..संग करें
सबसे राम-रहीम.

तपन शर्मा का कहना है कि -

मनु जी.. कम्पीटिशन तो बनता है...:-)
वैसे आप शेरो शायरी और कार्टून बनाना जारी रखें... उसमें जो मजा है वो लम्बे लम्बे वाक्यों में नहीं....

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