Friday, January 18, 2008

बापू

बापू

पुतली बाई का मान
करमचंद की संतान
मोहनदास नाम जिसका
वह बेटा बना महान ।

अहिंसा थी तलवार
सत्य उसकी धार
दुश्मन को भी गले लगा
करते सबको प्यार ।

काम अपना खुद करते
नही किसी से थे डरते
मीलों -मीलों तक वह
लगातार पैदल चलते ।

इंसानों में भेद मिटाया
गोरा- काला एक बताया
अछूतों को हरि-जन बता
उनको अपने गले लगाया ।

'सत्याग्रह' बना आधार
'सविनय अवज्ञा' एक विचार
'दांडी यात्रा', 'भारत छोड़ो'
इनसे हिली ब्रिटिश सरकार ।

'महात्मा' कहा टैगोर ने
'राष्ट्रपिता' बलाया बोस ने
बस गए हृदय वह सबके
'बापू' पुकारा जन जन ने ।

कवि कुलवंत सिंह


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6 पाठकों का कहना है :

sahil का कहना है कि -

कुलवंत जी बहुत प्यारी कविता.बापू की बात ही निराली है,
आलोक सिंह "साहिल"

seema gupta का कहना है कि -

इंसानों में भेद मिटाया
गोरा काला एक बताया
अछूतों को हरि-जन बता
उनको अपने गले लगाया ।
"very nice .loved reading it, bachpan mey yaad kertey thye aise poem ko"

रंजू का कहना है कि -

कुलवंत जी बापू जी के बारे में बहुत अच्छा और सच्चा लिखा है आपने .बहुत पसंद आई आपकी यह कविता !!

sunita yadav का कहना है कि -

कर्म और धर्म निरपेक्षता को परिभाषित करते हुए आप ने बापू को लाकर खड़ा किया ....
साधुवाद .....
सुनीता

Alpana Verma का कहना है कि -

बापू गाँधी पर यह नयी बाल कविता अच्छी रची गयी है.
आसानी से याद हो जाने वाली कविता बच्चों को अवश्य पसंद आएगी.

Sushma Garg का कहना है कि -

बहुत अच्छी कवित है कुलवंत जी. केवल इस कविता के आधार पर ही कोई भी बच्चा एक अच्छा निबंध लिख सकता है बापू के बारे में.
बधाई स्वीकारें.

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