Tuesday, January 29, 2008

मुन्ना तू काहे घबराए

मुन्ना तू काहे घबराए
कर हिम्मत सब कुछ हो जाए

नन्ही चिड़िया गगन में उड़ती
मीलों मीलों यात्रा करती
अपने लक्ष्य में दृष्टी रखती
तभी न थकती उड़ती चलती
क़्यों सोच में समय बिताए
मुन्ना तू काहे घबराए

तिनका लाए तिनका जोड़
जोड़ जोड़ घरौंदा बनाए
आँधी गरमी तूफाँ आए
हर मुश्किल से टकरा जाए
अपनी मेहनत का सुख पाए
मुन्ना तू काहे घबराए

ऊँची डगरिया नहीं सहारा
नीलगगन में कहाँ बसेरा
कन कन चुग के दाना लाए
आधी अधूरी भूख मिटाए
झूम झूम डाली पे गाए
मुन्ना तू काहे घबराए

पँखों से बली हाथ तुम्हारे
अमिट बल बुद्धि है पास तुम्हारे
आशीष बड़ों का साथ तुम्हारे
उनके अरमाँ तेरे सहारे
क्योँ तू इतना समझ ना पाए
मुन्ना तू काहे घबराए

तेरा जीवन अनमोल कहानी
धूप छाँव की डगर सुहानी
आत्म विश्वास से बढ़ते जाना
कभी ना पीछे कदम हटाना
तेरी मेहनत व्यर्थ न जाए
मुन्ना तू काहे घबराए

सुषमा गर्ग
29.01.08


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6 पाठकों का कहना है :

sahil का कहना है कि -

सुषमा जी बहुत ही प्यारी रचना
अलोक सिंह "साहिल"

seema gupta का कहना है कि -

तिनका लाए तिनका जोड़
जोड़ जोड़ घरौंदा बनाए
आँधी गरमी तूफाँ आए
हर मुश्किल से टकरा जाए
अपनी मेहनत का सुख पाए
मुन्ना तू काहे घबराए
" बहुत अच्छी रचना ,पसंद आई"
Regards

Bhupendra Raghav का कहना है कि -

चिड़िया के माध्यम से कर्मठता का सन्देश देती सुन्दर बाल रचना..

shobha का कहना है कि -

सुषमा जी
बहुत सुन्दर पाठ पढ़ाया है । जीवन की कठिनताओं की ओर संकेत करते हुए उनका सामना करने की शक्ति देने के लिए बधाई

Alpana Verma का कहना है कि -

पँखों से बली हाथ तुम्हारे
अमिट बल बुद्धि है पास तुम्हारे
आशीष बड़ों का साथ तुम्हारे
उनके अरमाँ तेरे सहारे'

बच्चों को अच्छी सीख देती हुई कविता है .

रंजू का कहना है कि -

बहुत ही सुंदर रचना ..बधाई सुषमा जी !!

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