Tuesday, January 15, 2008

सीख

जल्दी सोना जल्दी उठना
सीख सदा याद तुम रखना
प्रात: उठ लो प्रभु का नाम
सभी बडों को करो प्रणाम्
माता- पिता की सेवा करना
गुरू अपने को शीश झुकाना
दीन- दुखी की पीड़ा हरना
मीठी वाणी से जग अपना करना
अहँ भाव को दूर भगाओ
पुस्तक लेकर पढ़ने जाओ
घर के सारे काज सँवारो
अपनी हिम्मत कभी ना हारो
अनजानों से बच के रहना
लालच कर धोखा मत खाना
कभी किसी से तुम मत लड़ना
बात बात पे नहीं रुठना
भाई- बहन से राखो प्यार
सीखो विद्या बनो उदार
बात ज्ञान की भूल न जाना
नेक राह पर बढ़ते जाना
अपना जीवन सफल बनाना

सुषमा गर्ग
15.01.08


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10 पाठकों का कहना है :

shobha का कहना है कि -

सुषमा जी
बहुत सुन्दर -- कविता के माध्यम से सारी बातें सिखा दी आपने । बधाई स्वीकारें

रंजू का कहना है कि -

बहुत सुंदर लगी आपकी यह कविता .बहुत सी बातें बताती हुई !!

seema gupta का कहना है कि -

"जीवन के मूल्यों को समझाती हुई एक अच्छी रचना "
Regards

Bhupendra Raghav का कहना है कि -

सुषमा जी,

बहुत सुन्दर सीख दी कविता के माध्यम से..

कविता लिखी जो बच्चों के हित..
बच्चें अवश्य होंगें लाभांवित..

Alpana Verma का कहना है कि -

बिल्कुल सही सीख दे रही है आप की कविता,
ख़ास कर यह पंक्तियाँ जो आज के समय बच्चों को
अपनी सुरक्षा के लिए गाँठ बाँध लेनी चाहिये.
''अनजानों से बच के रहना
लालच कर धोखा मत खाना''
*कविता की हर पंक्ति में एक सीख है-
आशा है बच्चे समझेंगे और जीवन में इन्हें उतारेंगे.

sahil का कहना है कि -

सुषमा जी अच्छी रचना.
आलोक सिंह "साहिल"

रचना सागर का कहना है कि -

सुषमा जी
बहुत अच्छी सीख के साथ साथ बहुत अच्छी कविता

बधाई

Kavi Kulwant का कहना है कि -

सुषमा जी सुंदर लिखा है..

sunita yadav का कहना है कि -

सुषमा जी आप की कविता सराहनीय है ... बहुत खूब

सुनीता

sunita yadav का कहना है कि -

सुषमा जी आप की कविता सराहनीय है ... बहुत खूब

सुनीता

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